08/02/2021
अशोक मधुप
उत्तर
प्रदेश की राजनीति के एक कोने में पड़े ब्राह्मणों को बसपा ने एक ही झटके में
राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान पर पहुंचा दिया। ब्राह्मण सम्मेलन आयोजन करने की बात
कह कर उसने उत्तर प्रदेश के सभी दलों को
मजबूर कर दिया कि वह ब्राह्मणों को रिझाने के लिए काम करें।
अब
तक ब्राह्मण राजनीति में अच्छी स्थिति में नहीं रहा। । सबसे कम संख्या बता कर
उसे विकास की मुख्यधारा में शामिल नहीं किया गया। कम संख्या बताकर उसके हितों को
नजर अंदाज कर दिया जाता रहा है।उसके वोटों की गिनती नहीं की जाती। उसके हितों को
नहीं देखा जाता ।जरूरत पड़ने पर उसके हितों
को लात मारकर नीचे कर दिया जाता है।
राजनीतिक
दलों द्वारा अब तक मुस्लिम, दलित, पिछड़े वोटरों को रिझाने के लिए काम किया गया
।उनके लिए योजनाएं बनाई गई । अभी तक किसी भी पार्टी ने ब्राह्मणों के बारे में
नहीं सोचा। ब्राह्मणों ने मांगा नहीं तो किसी ने उन्हें दिया भी नहीं। राजनीतिक
दलों ने कतिपय ब्राह्मण नेताओं को अपने से
जोड़े रखा । पर कुर्सी पाकर वे अपने समाज को भूल गए।उन्होंने भी अपने समाज के लिए
कुछ नहीं किया। ब्राह्मणों के लिए कुछ नहीं सोचा।
आज
बसपा ने ब्राह्मण सम्मेलन शुरू किए हैं तो सपा भी ब्राह्मण सम्मेलन करने की बात कर
रही है। उत्तर प्रदेश की आप पार्टी का भी ऐसा ही इरादा है। अभी तक तो कोई संकेत
नहीं ,किंतु लगता है कि अपने वोट को रोकने के
लिए भाजपा को भी आगे आना होगा। उसे भी ब्राह्मणों के लिए सोचना होगा। उनकी योजनाओं
पर विचार करना होगा।
बसपा
के ब्राह्मण सम्मेलन से बसपा को फायदा लगे या ना लगे किंतु इतना जरूर है कि प्रदेश
के ब्राह्मणों के बारे में राजनैतिक दलों द्वारा अब जरूर पूछा जाएगा। राजनैतिक दल ज्यादा
समय उनकी उपेक्षा नहीं कर सकते हैं। अभी तक मुस्लिमों और यादवों के बूते पर
राजनीति करने वाली सपा भी ब्राह्मण सम्मेलन करने की घोषणा कर चुकी है। उसका
ब्राह्मणों को रिझाने का प्रयास होगा किंतु अपने कार्यक्रमों में उसे इस बात का भी
जवाब देना होगा कि मस्जिद के इमाम को प्रतिमाह मानदेय देते समय उसने मंदिरों के पुजारियों को मानदेय देने के
लिए क्यों नहीं सोचा। कब्रिस्तान की
बाउंड्री बनवाते समय हिंदुओ के मंदिर के विकास की योजनाएं क्यों नही बनी ?रालोद जाटों और पिछड़े मुस्लिमों को
जोड़ने की बात कर रही है। उसने कभी ब्राह्मणों के बारे में सोचा भी नहीं।
ब्राह्मणों का विकास उसके एजेंडे में कभी नही रहा। वैसे पश्चिम उत्तर प्रदेश में
आज वह निर्णायक स्थिति में भी नहीं है ,जबकि कभी यह उसका गढ़ होता था। आज उसे गठबंधन के मुद्दे पर चुनाव
लड़ना पड़ता है। कभी भाजपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ती है कभी सपा के साथ मिलकर
लड़ती है । कभी बसपा के साथ या कांग्रेस के गठबंधन से मिलकर। एक तरह से गठबंधन से
चुनाव लड़ना उसकी मजबूरी होगी। बसपा ब्राह्मण सम्मेलन तो कर रही है, ब्राह्मणों को उसका जोड़ने का प्रयास
भी है पर जब भी ब्राह्मण उससे जुड़ने की सोचता है तब तब उसे बसपा का वह नारा याद आ
जाता है -तीर, तराजू और तलवार इनको मारो जूते चार ।
कभी ब्राह्मण कांग्रेस का परंपरागत वोट था ।उसने
सदा कांग्रेस को वोट दिया और अपने को कांग्रेसी माना किंतु उसे कांग्रेसी ने सदा
निराश किया। आज का ब्राह्मण भाजपा के साथ है। भाजपा का वोटर है। ब्राह्मण समाज के
कई नेता भाजपा के विभिन्न पदों पर हैं लेकिन ब्राह्मण समाज के नेता और भाजपा यह
नहीं कह सकती कि उन्होंने ब्राह्मणों को लेकर कोई विशेष योजना बनाई।करोना कॉल में
सबसे ज्यादा खराब अवस्था में मंदिर के
पुजारी रहे ।मंदिर बंद रहे। उनके सामने भोजन और जीवन यापन की समस्याएं रहीं।
प्रदेश में भाजपा की सरकार है, किंतु
उसने भी ध्यान नहीं दिया।मन्दिर के पुजारी
को मस्जिद के पेश इमाम की तरह प्रति माह मानदेय देने की उसने भी नहीं सोची।
ब्राह्मण स्वाभिमानी है। पूजा पाठी है।वह भूखा रह लेगा पर,
वह
किसी के आगे गिड़गिड़ा नहीं सकता। इसी का यह कारण है कि वह सब सह रहा है।
आज जब ब्राह्मणों को रिझाने की बात चली है तो
भाजपा को भी जवाब देना होगा फिर उसने उनके लिए क्या किया ?क्या योजनाएं बनाई ?मंदिरों पर बैठाए गए सरकारी तंत्र से मन्दिर को मुक्ति क्यों नहीं मिली ?देश के मस्जिद ,गुरुद्वारे और चर्च जब
सरकारी नियंत्रण से अलग हैं तो मंदिरों पर
यह सरकारी प्रशासक क्यों ?क्यों मंदिर सरकारी नियंत्रण में हैं? उत्तरांचल में ब्राह्मण, धार्मिक संस्थाओं के जुड़े प्रतिनिधि
इसका विरोध भी कर ही रहे हैं ।आने वाले समय
में प्रदेश को भी इन चीजों का सामना करना पड़ेगा। प्रदेश की भाजपा को भी इसके लिए
सोचना पड़ेगा। ब्राह्मणों के लिए क्या योजनाएं बनाई,उसे भी उनके बीच आकर बताना
होगा।
अशोक
मधुप
(
लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं )
उत्तर
प्रदेश में बसपा के ब्राह्मण सम्मेलन
संपादक
जी,
उत्तर
प्रदेश में बसपा पार्टी से जोड़ने के लिए ब्राह्मण सम्मेलन कर
रही है। इसे लेकर अन्य दल भी सक्रिय हुए हैं। इसी पर एक लेख प्रकाशनार्थ प्रेषित
है।
सादर
अशोक मधुप
मोबाइल
9412215678
9675899803
ईमेल−ashokmadhup@gmail.com
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