विश्व स्वास्थ्य दिवस सात अप्रेल के लिए
हाल ही में कैबिनेट ने विमान अपहरणकर्ताओं के लिए फांसी की सजा का प्रावधान किया है। विमान अपहरण बहुत बड़ी घटना होती है किंतु होती यदा यदा ही है। 1971 से अब तक कुल आठ विमान अपहरण हुए हैं।
विमान अपहरण की अंतिम घटना 1999-2000 में हुई। इंडियन एयर लांइस के विमान को काठमांडू से अपहरण करके कंं धार ले जाया गया था। इस विमान के यात्रियों को मुक्त कराने के लिए तीन कश्मीरी आंतकवादी छोडऩे पड़े थे। एक यात्री आंतकवादियों के हाथ मारा गया था। दस साल बीत गए इसके बाद कोई विमान अपहरण की घटना नहीं हुर्ई। अब तक हुई आठ विमान दुर्घटनाओं में एक विमान अपहर्ताओं ने जलाया और एक यात्री की हत्या की।
सभी इस बात के पक्षघर है कि विमान अपहर्ताओं को फंासी की सजा दी जाए किंतु उससे बड़ी जरूरत है नकली दवा के व्यापार करने वालों का फांसी की सजा देने की। विमान अपहरण में तो या कदा ही हम फंसते हैं नकली दवा का मकडज़ाल तो हमे रोज लील रहा है। हमारे जीवन को दुरूह और पीड़ादायक बनाने में लगा है।
2001 के आंकड़ों के अनुसार दुनिया में चल रहे नकली दवा के कारोबार में भारत में सबसे ज्यादा नकली दवा का कारोबार होता हैे। यहां 35 प्रतिशत दवाई नकली बिकती है। यहंा मिलने वाली हर पांचवी दवा नकली है। चिकित्सकों की माने तो आज बाजार में 50 प्रतिशत के आसपास नकली दवा बिक रही है। एक अनुमान के अनुसार नकली दवा का व्यवसाय प्रतिवर्ष 1000 करोड़ रूपये का माना जा रहा है।
अभी आए आंकड़ों के अनुसार परीक्षण में उत्तर प्रदेश की 27 कंपनियों की दवांए नकली निकली। यह कंपनियां एक या दो कमरों में ही चल रही है। कई जगह पर उनके ही मैडिकल स्टोर है। 2009 और 2010 में राज्य विश£ेषक लैब लखनऊ में हुई 127 नमूनों की जंाच में 24 दवाएं नकली और 103 निम्र स्तरीय पांई गईं। प्रदेश में की गई कार्रवाई में 44 फार्मेसियों के लाइसैंस कैंसिल किए गए। 45 के लाइसैंस सस्पैंड हुए। 65 कंपनी और होलसैलर को वार्निग दी गई। यह भी पता लगा किं ड्र्रग कंट्रोल एक्ट के अंतर्गत सरकारी अस्पतालों के लिए खरीदी गई दवा भी नकली है।
नकली ओर अधो मानक मिलने वाली दवाओं में एंटीबायोटिक, पेन कीलर ,बुखार उतारने वाली पेरासीटामोल और कफ सीरप आदि शामिल है। चिकित्सकों की माने तो वह दवा नकली बन रहीं हैं जो ज्यादा बिकती है।
बिजनौर के एक चिकित्सक को एक ऐसा नकली इंजैक्शन मिला जो हार्ट अटैक होने पर मरीज को लगाया जाता है।
बिजनौर के ही मंडावर कस्बे में पिछले दिनों नकली दवा की बड़ी खेप पकड़ी गई। चंादपुर में नकली दवा बनाने की एक कंपनी पकड़ी ही जा चुकी हैं । एक्सपार डेट की दवा बेचे जाने की घटनांए तो रोज प्रकाश में आती रहती हैं।ं ऐसी दवाए भी बड़ी तादाद में है जिन्हे फ्रिज में या धूप से दूर रखने के आदेश है, किंतु उनका पालन नही होता और ये दवाएं गुणवत्ता हीन हो जाती है।
नकली दवा से होने वाली मौतों के आंकड़े तो नही मिलते किंतु दर्द से कराह रहे व्यक्ति को नकली दवा मिलने पर दर्द कम न होने पर उसकी हालत का अंदाजा लगाया जा सकता है। एंटाबायोटिक दवाइयां इंफैकशन को कम करने के लिए दी जाती है। कई बार इंफैकशन बहुत ही गंभीर होने और जीवन मृत्यु से जूझ रहे मरीज को नकली एंटीबायोटिक लगने पर उसकी मौत होना स्वाभाविक है। चिकित्सक नहीं समझ पाता कि सही दवा देने पर भी मरीज की मौत क्यों हुई। उधर मरीज के परिवार जन हाथ पर हाथ रखकर रह जाते हैं। उपचार में जरूरत अनुरूप धन खर्च करने पर भी वे अपने प्रिय के प्राण नही बचा पाते।
प्रश्र यह है कि विमान अपहरण के मामले में हम फंासी का प्राविधान करते है। वह विमान अपहरण जो यदा कदा ही होते हैं। दवाई मरीज को उसकी बीमारी से लडऩे ,उसे जल्दी स्वस्थ करने ,रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने को तथा बीमारी की पीड़ा कम करने को दी जाती है। ये दवा ही नकली हो तो क्या हो। नकली दवा के कारोबारी आम आदमी की जिंदगी को और दूभर बनाने में लगे हैं। वे कम पैसा लगाकर जल्दी मालामाल होने के चक्कर में आम जन के जीवन को कष्ट में डाल रहे हैं। इनके लिए हम फंासी की सजा का पा्र्रविधान क्यों नही करते । प्रदेश मे नकली दवा बनाने पर 44 कंपनियो के लाइसैंस निलंबित हुए। 45 के संस्पैड हुए। प्रश्र यह है कि इनके विरूद्ध अपराधिक मामले कक्यो ंनही दर्ज होते। रासुका मे निरूद्ध करने की कार्रवाई क्यो ंनही की जाती।
आज जरूरत इस बात की है कि हम नकली दवा के कारोबार में लगे व्यक्तियों के लिए ऐसी सजा का प्राविधान करे कि आदमी नकली दवा का कारोबार करते डरे। सउदी अरब अमीरात में शराब का व्यापार प्रतिबंधित है। इस व्यापार मे ंएक पाकिस्तानी की मौत के बाद वहां 17 भारतीयों को न्यायालय फांसी की सजा देता है। नकली दवा का व्यापार रोकने काहमे कुछ इसी तरह के प्राविधान करने होंगे। इन मामलों में ऐसी व्यवस्था करनी होगी की ,ज्यादा से ज्यादा छह माह में अपराधियों के केस का निस्तारण हों जांए। केस के लंबे चलने से अपराधियों के हौसले बढ़ते हैं।
नकली दवा के कारोबार के नुकसान के लिए हम जनचेतना पैदा करने का भी काम नही कर रहे। यदि हम नकली दवा के काराबारियों को यह बता देें कि हो सकता है कि इसे खाने वाला आपका कोई प्रिय जन या आप ख्ुाद हो सकतें हंैं, तो शायद वह इससे परहेज करे। अब तक तो वह सही सोच रहा है कि इन दवाइयों से उसे तो केाई नुकसान हो नही रहा है।
हाल में मिलावट करने वालों के प्रति न्यायपालिका कुछ कठोर हुई है, बिजनौर कें एक मामले मे वह आरोपियों केा अजीवन कारावास की सजा सुना चुकी है। पर नकली दवा के प्रकरण में तो यह सजा बहुत कम है।
विश्व स्वास्थ्य दिवस पर हमे संकल्प लेना चाहिए कि हमारा जीवन लील रही नकली दवा के कारोबार को बंद कराने के लिए हम तब तक आवाज उठाते रहेेंगे , जब तक की सरकार इस पर रोक लगाने के लिए कठोर कानून नही बनाती। इस व्यपार में लगे व्यक्तियों को फंासी की सजा नहीं देती।
अशोक मधुप
04/03/2010