देश में कमोडिटी बाजार के जानकार बड़े जोर शोर से कुछ समय से दावे करने में लगे है कि सोने का मूल्य बढक़र २० हजार तक पंहुच सकता है । यह मूल्य हाल में १९ हजार से ऊपर तक जा भी चुका है। हमारा कहना है कि सोने को २० हजारी होने से रोकिए , आधी दुनिया अर्थात महिला जगत के सपनों को टूटने से बचाइए। उसका तो एक बड़ा सपना सोने के ज्यादा से ज्यादा जेवर खरीद करना ही होता है।
कनक कनक ते सौ गुनी मादकता अधिकाए,यह खाए बौराए जग ,यह पाए बौराए, वाली कहावत पुरानी पड़ गई आज तो सोने को संग्रह करना की बात सोचना भी एक सपना होता जा रहा है। आधी दुनिया के जेवर पहनने की चाह एक मृग मरीचिका बनती जा रही है। हर युवती और महिला का बड़ा सपना होता है, उसके पास ज्यादा से ज्यादा सोने के जेवर हों। सोने के जेवर महिलाओं के पहनने और सजने के लिए आदि काल से प्रयोग होते रहे हैं। प्रत्येक मां बाप की भी चाह होती है कि उसकी बेटी जब ससुराल जाए तो वह खूब सारे सोने के जेवरों से लदी हो, उसके पास जितने ज्यादा सोने के जेवर होंगे, उसे उतना ही ज्यादा सम्मान ससुराल में मिलेगा। उधर लडक़े के माता पिता भी लडक़ी के परिवार वालों और रिश्तेदारोंं पर रोब डालने के लिए वधु को ज्यादा से ज्यादा सोने के जेवर देना चाहतें हैं।
प्राचीन काल में बैंक आदि नहीं होते थे। हर परिवार अपने भविष्य के लिए आपदा के समय काम आने के लिए कुछ ऐसी चीजे संग्रह करना चाहता था, जो जरूरत के समय प्रत्येक स्थान पर स्वीकार्य हो। मुद्रा का प्रचलन न होने के कारण सोने में विनिमेश सबसे सरल और सुलभ समझा गया। महिलाओं की चाह सजने संवरने की होती है, उनकी चाह जेवर पहनने की रही तो हर पुरूष अपनी पत्नी को सजाकर-सवारं कर प्रसन्न रखना चाहता था। इसी कारण सोने के जेवर सबसे ज्यादा पसंद किए गए। सोने के जेवर संग्रह का एक लाभ भी था कि चाहें कही भी रहा जाए सब जगह सोने की मांग बनी रहती थी। पहले प्राणी छोटे छोटे समूह में रहता था, भोजन एवं अन्य जरूरतों के लिए वह एक स्थान से दूसरे स्थान पर आते जाते रहते थे। सोना और उसके जेवर एक ऐसी वस्तु थी कि जरूरत पर उसे कहीं भी बेच कर परिवार का भरण पोषण किया जा सकता था, बीमारी में इलाज कराया जा सकता था। पशु खरीदे जा सकते थे। घर बनाया या खरीदा जा सकता था।
इतनी उपयोगी वस्तु को संग्रह करने की प्रत्येक व्यकित की आदि काल से लालसा बन गई। यह हर समय नजर के सामने रहे इसलिए इसे शरीर पर धारण करने का चलन हुआ और जेवर बने। अब तो घड़ी की चैन तक सोने की बनती हैं।
सोने के मंहगा होने से हर मां बाप का वह सपना चकना चूर हो रहा है कि उसकी बेटी ससुराल जाए तो सबसे ज्यादा सजसंवर कर और और पूरी तरह सोने और उससे मंहगे गहनों से लदकर । प्रत्येक युवती का चाह होती है, कि उसके पास सबसे ज्यादा जेवर हो। १९ हजार रूपये के आसपास सोने का मूल्य पंहुचने से आज महिला विशेषकर युवतियों के सोने के ज्यादा से ज्यादा जेवर पहनने के सपने मृग मरीचिका बनते जा रहे हैं। शादी के समय मां बाप जेवर बनवा तो रहे है किंतु ओवर बजट होकर । चार सैट देने की चाह वाला परिवार किसी तरह मन मारकर एक सैट देकर ही काम चला रहा है। उधर सराफा बाजर भी सूने है। मात्र मजबूरी की ही खरीद फरोख्त हो रही है।
सोने के बढ़ते दाम देश की आधी दुनिया के सपनों पर हमला है। किंतु किसी का इस और ध्यान नहीं। आज देश की राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल एक महिला हैं।केंद्र की सरकार की धुरी सोनिया गांधी भी महिला है किंतु ये दोनों एक एंसे वर्ग का प्रतिनिधित्व करती हैं, जहां धन की कमी कभी आड़े नहीं आती। उन्हें शायद यह भी पता न हो कि भारतीय महिला का सपना क्या है, आधी दुनिया की एक बड़ी अभिलाषा क्या है।
अशोक मधुप
09/04/2010
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