Friday, June 19, 2026

आतंकवाद रोकने को प्राईवेट सिक्यूरिटी मजबूत कीजिए

 



26/11 के हमलों से नहीं लिया हमने सबक

मुंबई के 26 नंवबर हमले के मुख्य आरोपी अजमल अमीर कसाब इस प्रकरण के लिए दोषी करार दे दिया गया।  न्यायालय ने इसके लिए फांसी की सजा सुनाई हैं।

26 नंवबर 2008 को दस आंतकवादियों ने आंतक फैलाने के लिए मुंबई पर धावा बोला था।ताज ,ओबराय,नरीमन होटल में टिके यात्री और मंुबइ सैंटल रेलवे स्टेषन  और कामा अस्पताल को इंन्होने निषाना बनाया। इन्होंने एके 47 जैसे आधुनिक हथियारों से होटल और प्लेट फार्म के यात्रियों पर फायरिंग ही नही की अपितु बम भी फेंके। इन पर काबू पाने मे सुरक्षा बल औंर कमांडो को 60 घंटें से ज्यादा लगे।ं  इस हमले में 167 व्यक्ति मारे गए और 293 घायल हुए। पूरी दुनिया में गूंजने वाले इस हादसे को बीते हमे डेढ साल से ज्यादा हो गया किंतु हमने इससे कोई सीख नही ली। इस घटना में मारे गए परिवारों और घायलों की पीड़ा पर मरहम लगाने के लिए कार्य नहीं किये गए ।हम इस तरह के हादसे रोकने के लिए व्यापक तैयारी कर उन्हें यह आष्वस्त कर सकते थे कि भविष्य में हम ऐसा न होने देंगे। आतकवादियों की गोली अब किसी भारतीय को नही छू पाएगी।हम पूरी दुनिया और अपने नागरिकों को यह संदेष देने में नाकामयाब रहे कि हम अपनी अस्मिता और सीमाओं की ओर किसी दुष्मन को नजर उठाने नही देंगे। नागरिको के जीवन से खिलवाड़ करने वालों का किसी कीमत पर माफ नही किया जाएगा। ं

 इस हमला होेने के डेढ़ साल से ज्यादा बीत जाने के बाद भी हमने ऐसी कोई तैयारी नही की भविष्य में ऐसे हमले न हो। इनसे बचने या ऐसा अवसर आ जाने पर की जाने वाली कार्रवाई  और ली जाने वाली सतर्कता के प्रति अपने सुरक्षा बल और जनता को प्रषिक्षित करने का काम नही किया।

 आतंकवाद का निषाना कोई विषेष स्थान नहीं होता। वह कभी अक्षरधाम मंदिर को अपना निषाना बनाता है, तो कभी ंसंसद में आकर संासद और मंत्रियो को मारने का प्रयास करता हैं। अयोध्या  में रामभूमि में घंुसकर वह  देष की अस्मिता को चुनौती देता है तो उत्तर प्रदेष के रामपुर के सीआरपीएफ कैंप के घंुसंकर हमारे सुरक्षा बलो को भी निषाना बनाए  बिना रही रहता। कभी दिल्ली बंगलौरू, हैदराबाद आदि के भीड़ भरे बाजार उसका निश्षाना  बनते रहे  हैं। तो समझौता एक्सप्रेस के या़ित्रयों  को भी षिकार बनाया जाता है। अंातकवाद कब, कहा मुंह फैलाकर आकर खड़ा हो जाए नही कहा जा सकता। अंातकवादी कहीं भी आकर लोगांे को अपना षिकार बना सकतें है। मॉल, सिनंेमाघर भी उसके निषाने पर आते रहे हैं। मंुबई में अस्पताल के घायलों और उनके तीमारदारों को भी मारा गया। आंतकवाद का काम समाज में आतंक फैलाना है,दुनिया की घटनांए गवाह है कि आंतकवादियों ने स्कूूली बच्चों और सृकूलों तक में घंुसकर वारदात की है।

भारत जैसे बड़े देष में सब जगह सुरक्षा बल तैनात करना संभव नही। हर दरवाजे पर जवान तैनात नहीं किया जा सकता। हमारे महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए हमारे पास केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल है। इससे 1,04,462 जंवान देष के, परमाणु और बिजली संय़त्र,अंतरिक्ष,टकसाल, रिफाइनरी आदि 269 महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा कर  रहे  हैं।   ं         

माल,होटल,प्राइवेट फैक्ट्री,दूरभाष केंद्र ,अस्पताल , बडे़ ओ़द्योगिक कोप्लैस ,आवासीय कालोनी ं आदि की सुरक्षा तो आजकल उद्योग प्रंबधन प्राइवेट सिक्योरिटी से ही कराता है। ताज होटल हो या होटल ओवराय प्रायः सभी में सुरक्षा के लिए प्राइवेट सिक्यूरिटी ही लगी है।ं अस्पतालों आदि की सुरक्षा भी प्राइवेट सिक्यूरिटी के पास है। इसके  कर्मचारी सिर्फ छोटेे से बेत नुमा डंडे के सहारे हमारी सुरक्षा कर रहे है।


देश्ष की जानी मानी सिक्यूरिटी कंपनी ओम सिक्यूरिटी के एमडी ओम कुमार बताते है कि आज देेष भर में प्राइवेट सिक्यूरिटी के तैनात कर्मचारियों की संख्या 50 लाख से ज्यादा है। इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।प्राइवेट सिक्यूरिटी में आज प्रतिवर्ष दस लाख नए अवसर पैदा हो रहे हैं। 

आंतकवादी जहां एके 47 जैसे आधुनिक ष्षस्त्र लेकर हमला करने आ रहे हैं, वही प्राइवेट सिक्यूरिटी कंपनी के तैैनात  कर्मचारियों में  90 से 95 खाली हाथ ही होते  हैं। प्राइवेट सिक्यूरिटी में  पाच सें दस प्रतिषत के पास ही ष्षस्त्र हैं। ष्षस़्त्र वाले सुरक्षा कर्मचारियों में से 90 से 95 प्रतिषत के पास इकनाली या दूनाली बंदूके हैं,   बाकी कुछेक के पास 315 बोर की राइफल। इन राइफल को हर बार फायर करने के लिए लोड़ करना पड़ता है।एके 47 और एके 56 जैसे आधुनिक हथियार के सामने एक सिक्योरिटी कोई मायने नहीं रखती । सब जगह जवान लगाए नहीं जा सकते, ऐसे में हमे प्राइवेट सिकयूरिटी पर ही निर्भरता बढ़ानी  पड़ रही है।   

आज जहंा प्राइवेट सिक्यूरिटी पर विष्वास बढ़ रहा है, वहीं जरूरी यह होता जा रहा है कि इसं प्राइवेट बल को मजबूत ही नहीं किया जाए अपितु आधुनिक ष्षस्त्रों के साथ आंतकवादी हमलों से निपटने का प्रषिक्षण भी  दिलाया जाए। हाल में उत्तर प्रदेष सरकार ने  प्रदेष में कार्यरत 300 प्राइवेट सिकयूरिटी कंपनी के सवा लाख से ज्यादा स्टाफ को आंतकवाद से निपटने के लिए आधुनिक प्रषिक्षण देने का निर्णय लिया है। ओम कुमार कहते हैं कि सरकार  को देष की प्राइवेट सिक्यूरिटी केा आंतकवाद से निपटने का प्रषिक्षण देना ही पर्याप्त नही र्है, उसे अत्याधुनिक ष्षस्त्रों से भी लैस करना होगा।   

वे कहते है कि ष्षस़़्त्रों के लाइसैंस जिलाधिकारी देते है। उनकी रूचि इस कार्य में नही होती। यह कार्य रक्षा मं़त्रालय में कोई प्रकोष्ठ बनाकर सुकयोरिटी कंपनियों के स्टाफ यां कंपनी को प्राथमिकता के आधार पर  दिया जाना चाहिए। आज भी बैंक या बडे़ प्रतिष्ठानो ष्षस्त्रों के ं लाइसैंस दिए जाते हैं,उनमे तैनात कर्मचारियों का नहीं।वर्तमान हालात मे एके 47 जैसे ष्षस्त्रों के लांइसैस प्राइवेट सिक्यूरिटी कंपनी को देने होंगें। यह सुरक्षा देने वाला बहुुत बड़ा बल है, मंबई जैसी 26 नवबर की घटनांए रोकने के लिए इस प्राइवेट सिक्यूरिटी  बल को  आंतकवादी हमलों से निपटने के लिए सक्षम बनाना होगा।  


अशोक मधुप

26/07/2010



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