11/03/2021
एक विडियो में एंकर
जनता को बड़ा नही, मजबूत बनने की सलाह दे
रहा है। साहसी बनने की सलाह दे रहा है। कह रहा है कि जंगल में बड़ा जानवर तो जिराफ और हाथी होते हैं किंतु वे शेर
से डरते है। इसलिए शेर बनिए। निडर बनिए। बड़े मत
बनिये । ये बात कहने के लिए अच्छी है, वास्तविकता में नही। वास्तविकता में
तो कुछ और ही है। सच्चाई इससे कोसो दूर है।
बच्चे को हम बचपन से
डराते हैं। कभी कुत्ते से डराते हैं, कभी भूत से।कभी प्रेत से ।कभी पुलिस से।बच्चे
के मन में अलग −अलग तरह के डर बैठाते हैं।
हम उसके अंतर्मन में भय बैठाते हैं कि वह कुत्ते से डरे। भूत से डरे।प्रेत से
डरे।पुलिस से डरे।जो बच्चा कुत्ते से डरता है। भूत से डरता है, वह बाघ का कैसे
मुकाबला कर सकता है। बाघ का मुकाबला करने के लिए तो बच्चे को बाघ ही बनाना होगा।
निडर बनाना होगा। भरत को हमें निर्भीक
बनाना होगा ,साहसी बनाना होगा, तभी तो वह बाघ का मुकाबला कर सकेगा, उसके दांत गिन सकेगा। अगर ऐसा नही होगा तो वह कुत्ते −बिल्ली को देख घर में
घुंस जाएगा। परदा हिलने पर या जरा से शेर पर घर में घुंसकर छिप कर बैठ जाएगा।
अमेरिका तथ अन्य कई
देश में बच्चे को पीट नहीं सकते।डांट नहीं सकते। डरा नहीं सकते।
बच्चे को डाटने वाले
माता− पिता से बच्चा लेकर चाइल्ड केयर होम भेज दिया जाता है। हमारे यहां ऐसा नहीं है।हमारे
यहां बच्चे को डराया जाता है। धमकाया जाता है।दूसरे देशों में बच्चे को जूडो –कराटे
और कुंगफू आदि युद्ध कला
सिखाकर प्रत्येक विपरीत परिस्थिति
से लड़ने के लिए तैयार किया जाता है।
अंग्रेजों के देश
में शासन से पहले माता− पिता अपने बच्चों को सम्मान के लिए लड़ना −मरना सिखाते
थे।उन्हें बताया जाता था कि सम्मान ही सबसे प्रिय है। राजस्थान इतिहास ऐसे किस्सों से भरा
पड़ा है,जब मां अपने किशोर बेटे को युद्ध के लिए भेज देती है। जब पत्नी अपने पति को युद्ध के लिए तिलक कर विदा
करती थी। राजा दशरथ ऋषि −मुनियों की रक्षा के लिए राम और लक्ष्मण को मुनि
विश्वामित्र के साथ भेज देतें हैं। राजा रतन सिंह चूड़ावत को युद्ध के लिए विदा
करते नवविवाहिता हाडा रानी अपने प्रति पति
का मोह भांप जाती है। युद्ध क्षेत्र में
पति को सेवक के हाथ अपना शीश काटकर भिजवा
देती हैं। ताकि वह पूरी क्षमता से लड़े। हमारा
इतिहास ऐसे किस्सों
से भारा पड़ा है।प्रत्येक गांव और शहर
में ऐसे किस्से सुनने को मिल जांएगें, पर अब ऐसा नहीं होता।
ऐसा इसलिए नहीं होता क्योंकि हम बच्चे को कुत्तों
से डरा रहे है।भूत से डरा रहे हैं। मुहल्ले के गुंडे की गलत हरकत पर हम विरोध नहीं
कर रहे। बच्चे विरोध करते हैं तो उन्हें समझाकर चुप कर देते हैं।बच्चे का उसका
दोस्त गाली देता है, तो हम अपने को ही समझाकर
चुप कर देते हैं। उसकी विरोध करने की शक्ति को कमजोर कर देते हैं।
जरुरत है कि हम
बच्चे को मजबूत बनाएं। देश का जिम्मेदार
नागरिक बनाएं।उसे प्रत्येक विपरीत हालात से लड़ने के लिए तैयार करें।ये कार्य उसके
जन्म से ही शुरू करना होगा।बेटे ही नहीं बेटियों को भी इतना मजबूत बनांए कि वह हर
गलत बात का प्रतिरोध कर सके। विपरित परिस्थिति का जमकर मुकाबला कर सके।
अशोक मधुप
(लेखक वरिष्ठ
पत्रकार हैं)
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