वृद्धावस्था अभिशाप भी है वरदान भी। ये अपके जीने का तरीका है कि आप उसे
अभिशाप समझतें हैं या वरदान।अभिशाप समझेंगे तो जल्दी चल देंगे।वरदान समझेंगे तो
आनंद लेंगे। ज्यादा जीवन जिएंगे।वृद्धावस्था में भी युवा जैसा भोगेंगे ।
जिन्होंने रिटायर होते ही अपने का रिटायर मान लिया। उनकी कहानी जल्दी खत्म
हो गई। जिंन्होंने नही माना, वह मस्त रहे।
बिजनौर के एक शायर हुए हैं शौक बिजनौरी।वह कलेक्ट्रेट में डीएम के पेशकार होते
थे। सेवानिवृति पर उनके लिए कलेक्ट्रेट
में विदाई समारोह रखा गया।उन्होंने कहा –
आप विदाई पर जो मुझे गले में जो पहना रहें
हैं। उन्हें फूलों की माला कहना। गजरे कहना। हार मत कहना। मैंने नौकरी से हार नही मानी । मैं रिटायर नही हो रहा। नौकरी को रिटायर करके जा
रहा हूं। मैंने 30 साल नौकरी की और देखना उससे ज्यादा समय पेंशन लूंगा।हुआ भी ऐसा ही। वे लगभग 95 साल जिए। आखिरी के समय में उन्हें कान से कुछ ऊंचा सुनाई देने
लगा था। घुटनों में दर्द था । मैंने उनसे कहा− कुछ दवा लीजिए।
उन्होंने
जो कहा वह सुखद और आश्चर्य करने वाला है।उन्होंने कहा− 90 साल से ज्यादा उम्र हो गई ।आज तक इंजेक्शन नहीं
लगवाया। कोई दवा नही खाई। अब किसलिएॽ किसके लिए ॽ
हां
कुछ चीजे ध्यान रखने की है। बुढ़ापा आना है तो इसका खुद प्लान कीजिए। इसके लिए
पहले से ही बजट बनाकर रखिये। उसी तरह निवेश कीजिए। इताना ज्यादा भी नहीं कि जवानी
में बदहाल जीवन जिया जाए। एक परिवार के मुखिया ने अपने बच्चों से कहा कि घर में छह माह का अनाज है। या तो शुरू के छह
माह खालो । उसके बाद फाके रहना। या शुरू
के छह माह भूखे रहो । बाद के छह माह खा
लेना।
हमें न
शुरू के छह माह भूखे रहना है न बाद के ।
हमें थोड़ा कम खाकर , उसी में से बचाकर
पूरे साल काम चलाना है।
दूसरी
बात यह कि यह सोचकर जवानी में मस्ती मत मारिए कि
बुढ़ापे में बच्चे आपके लिए करेंगे। सोने के पालने में झुलाएंगे। वे
करेंगे।
अपनी सामर्थ्य के हिसाब से खूब करेंगे। फिर भी आप बुढापे के लिए प्लान कीजिए ।
बचाइये। ये भी ध्यान रखिए कि बच्चों के भी अपने परिवार होंगे। उन्हें उसके लिए भी
करना है।उनसे आपात्काल की मदद की सोचिए बस। प्रयास कीजिए कि किसी से मांगना न
पड़े। भले ही वे आपके बच्चे हैं।
यह भी
ध्यान रखिए कि जीते जी अपनी संपत्ति का बंटवारा मत कीजिए। अपना धन अपनी संपत्ति
अपने पास रखिए। विश्व प्रसिद्ध रेमंड कंपनी के स्वामी संपत्ति बांटकर आज परेशान हैं। बच्चे
न उन्हें घर में घुंसने देते हैं, न फैक्ट्री में। हां वसीयत जरूर करके रखिए ।
बैंक खातों और कागजों में नाँमनी जरूर कराईए।अपने जीवन साथी के साथ दो नंबर पर
अपने बच्चों को नाॐमनी करा सकतें हैं।
−जवानी
में ही स्वास्थ्य बीमा जरूर लीजिए। आगे चलकर वह मंहगा हो जाता है। अपने को व्यस्त करिए। लीखिए , पढ़िए या किसी सामाजिक
कार्य में लग जाइये ।खाली मत रहिए।खाली दिमाग शैतान का घर होता है।
इस
दुनिया में आए हैं तो आपके कार्य निर्धारित हैं। उसके बाद चल देना है। भगवान राम
राक्षसों के विनाश के लिए आए थे। राज करने के लिए नहीं। राज करने का समय आया तो
मुनि जी बुलावा लेकर आ गए । मुनि जी के
बुलावा आने का इंतजार मत कीजिए। उनके आने से पहले किसी अच्छे कार्य के लिए जीवन अर्पित
कर
दीजिए। जो कीजिए निस्वार्थ भाव से कीजिए । लिप्सा , माया, मोह और पुरस्कार के लालच
में मत रहिए।
अशोक
मधुप
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