Thursday, November 9, 2023

युद्ध कैसे रूके ,हमास−इस्राइल तो मानने को तैयार ही नहीं






 युद्ध कैसे रूके ,हमास−इस्राइल तो मानने को तैयार ही नहीं


अशोक मधुप


वरिष्ठ  पत्रकार


ये यक्ष  प्रश्न दुनिया में गूंजने लगा है कि हमास और इस्राइल युद्ध  कैसे  रूके? दुनिया  चाहती है कि युद्ध  रूके ,शांति हो। इस युद्ध में हो  रहे मानवता का विनाश  बंद  हो। पर प्रश्न है कि हो कैसे ?न इस्राइल मानने  को तैयार है न हमास।इन दोनों  की जंग में गाजापट्टी   का आम नागरिक बच्चे  और औरतें मर रही हैं।घायल और बीमार को इलाज नही मिल रहा। गाजापट्टी में हुआ  विकास बड़े− बड़े भवन, व्यापारिक केंद्र अस्पताल खंडहर में तबदील होते जा रहे हैं।


हमास ने सात  अक्टूबर को इज़राइल में हमला  करके


इज़राइल के साथ-साथ क्षेत्र में  चल रहे  सामान्यीकरण और शांति के प्रयासों  को बंद कर दिया। इस्राइल  पर हमास ने औचक हमला  कर सबको चौंका दिया। किया।इस हमले में 20  मिनट में पांच  हजार के आसपास राकेट दागे गए।इतना ही नहीं यह इस्राइल का  सुरक्षा घेरा  और दीवार तोड़कर अपनी सुरक्षा और मारक क्षमता के  लिए विख्यात इस्राइल में घुंस गए।उन्होंने  इस्राइल में भारी तबाही मचाई।  इस हमले में  इस्राइल के एक हजार से ज्यादा नागरिक मारे गए। तीन हजार के आसपास घायल हुए हैं। सूचनाएं हैं कि 250 के आसपास महिला और बच्चों सहित इस्राइल के  नागरिकों  का अपहरण कर लिया।हमास के आंतकियों ने महिलाओं का निवस्त्र कर उनके सम्मान को  तार− तार करने  कोई  कसर नही छोड़ी। हमास ने सड़कों पर महिलाओं के नग्न शव घुमाए गए थे और बच्चों को काटकर, जलाकर या अन्य क्रूर तरीकों से मार डाला गया था। इसके बाद इजराइल जवाबी कार्रवाई कर रहा है।


इस्राइल की सुरक्षा व्यवस्था, सेना और गुप्तचर व्यवस्था  पूरी दूनिया में  विख्यात हैं।इस सबके  बावजूद वहां इतना बड़ा नुकसान हुआ।इस्राइल के पास दुनिया  का आधुनिकतम  सुरक्षा, प्रतिरक्षा  और विश्व विख्यात सूचनातंत्र है।फिर भी वह इस हमले के सामने विफल  होकर रह गया। इससे भी महत्वपूर्ण और बडी बात यह है कि इस्राइल  की सैन्य अजेयता की प्रतिष्ठा धूमिल हो गई है। इससे इजराइल बौखलाया हुआ है। वह गुस्से में बुरी तरह तिलमिला रहा है।  परिणाम स्वरूप उसका इरादा हमास  को खत्म कर देने का  है।  एक माह से चालू युद्ध  में वह गाजा पर बड़े  पैमाने पर हमले कर रहा है।उसका इरादा हमास को पूरी तरह खत्म कर देने का  है।इस्राइल गाजा पर बड़े पैमाने पर हमले का सहारा ले रहा है ताकि वह उस प्रतिरोध को बहाल करने की कोशिश कर सके जो उसे कभी मिला था, फिर भी यह निश्चित नहीं है कि अगर गाजा को नष्ट कर दिया जाता है और फिर से कब्जा कर लिया जाता है तो भी वह इसे पूरा कर पाएगा।


 दरअस्ल  युद्ध  हमास  और इस्राइल  के बीच  है।हमास फ़लस्तीन का इस्लामिक चरमपंथी समूह है, जो गाज़ा पट्टी से संचालित होता है। 2007 में गाज़ा पर नियंत्रण के बाद हमास के विद्रोहियों ने इसराइल को बर्बाद करने की कसम खाई थी।तब से लेकर हालिया हमले तक ये चरमपंथी संगठन इस्राइल के साथ कई बार युद्ध छेड़ चुका है।दूसरा पक्ष  इस्राइल है।  हमास और इस्राइल के युद्ध में  गाजापट्टी   का आम नागरिक बच्चे पिस रहे हैं,इसका युद्ध से कोई वास्ता नही।  युद्ध से कोई  लेना −देना नही। हमास इन्ही गाजापट्टी नागिरिकों  बीच छिपे  बैठे हैं।इस्राइल की परेशानी है कि वह हमास लड़ाकों और आम नागरिक  में भेद कैसे करे?  उसने गाजापट्टी   का आम नागरिक  से पिछले दिनों  अपील भी की कि वह गाजा  छोड जांए।काफी चले गए ,किंतु अब भी बड़ी संख्या में गाजा में रहने को मजबूर हैं।  आरोप है कि हमास  उन्हें नही जाने दे रहा। वह आम नागरिक की आड़ लेकर  बचना चाह रहा है।  


दुनिया  चाहती है कि यह विनाशकारी युद्ध रूके।इस्राइल पर दबाव भी है,किंतु  सात अक्तूबर का औचक और बड़े पैमान  पर हुए हमले को इस्राइल भुलाने को तैयार नही।  वह हमास को खत्म करके ही रूकने की बात कर रहा है। उधर इसके 250 के आसपास बंदी भी  अभी रिहा नही हुए। उस पर मानसिक दबाव है कि अपने इन बंदियों को सुरक्षित रूप से छुडाए। 


  


इसी दौरान फिलिस्तीनी आतंकी संगठन हमास के प्रवक्ता गाजी हमद  ने दावा किया है कि हमास सात अक्टूबर को इज़राइल पर किए गए हमलों को बार-बार दोहराएगा। बता दें कि, इस दिन हमास ने भूमि, वायु और समुद्र के माध्यम से यहूदी राष्ट्र में एक आश्चर्यजनक घुसपैठ शुरू की थी।इसी बीच 24 अक्टूबर को लेबनानी टीवी चैनल एलबीसी  के साथ एक साक्षात्कार में, हमास के प्रवक्ता गाजी हमद ने कहा कि, 'हमें पूरी ताकत के साथ यह कहने में कोई शर्म नहीं है। हमें इज़राइल को सबक सिखाना होगा और हम ऐसा बार-बार करेंगे।' गाजी हमद ने कहा कि 'इज़राइल एक ऐसा देश है जिसका "हमारी भूमि पर कोई स्थान नहीं है और फिलिस्तीनी "कब्जे के शिकार" थे।' उन्होंने "कब्जा समाप्त करने" का भी आह्वान किया।


उधर इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू का कहना है कि जंग ख़त्म होने के बाद "अनिश्चित काल" के लिए ग़ज़ा पट्टी की "पूरी सुरक्षा की जिम्मेदारी" इसराइल के पास होगी।अमेरिकी चैनल एबीसी न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में ये कहा है.इस इंटरव्यू में उन्होंने हमास के कब्ज़े से बंधकों को छुड़ाए जाने तक युद्ध रोकने की मांग को पूरी तरह ख़ारिज कर दिया।उन्होंने कहा, “जहां तक समय-समय पर छोटे-छोटे विरामों की बात है - एक घंटा या दो घंटे रुकना - हम पहले भी ऐसा कर चुके हैं। मेरा मानना है कि हम परिस्थितियों को देखेंगे, ताकि सामान, मानवीय मदद अंदर आ सके।”अमेरिका, फ्रांस सहित कई यूरोपीय देश इस संघर्ष को अस्थायी रूप से रोकने (पॉज़) की अपील कर रहे हैं।उधर इसराइली सरकार में मंत्री एमिचाई एलियाहू ने हमास के ख़िलाफ़ ‘ग़ज़ा पट्टी में परमाणु हथियार के इस्तेमाल’ की बात की है।  हालाकि  इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू  ने  इसका खंडन  किया है,किंतु  सरकार के एक मंत्री के बयान से स्पष्ट हो  जाताहै कि इस्राइल इस समस्या  से निपटने के लिए किसी भी  सीमातक जा सकता है।


  हमास के बारे में जानकारी रखने वाले मानते हैं कि सात  अक्टूबर को जब हमास ने हमला किया तो उसकी प्लानिंग ने सबको हैरान कर दिया। सात  अक्टूबर को किए गए हमले की प्लानिंग से पता चलता है कि हमास लबी अवधि  के लिए जंग लड़ने की तैयारी करके बैठा है।जंग शुरू होने से पहले हमास के पास 40 हजार लड़ाके बताए जा रहे थे। इजराइल की बमबारी में नौ हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। इजराइल के पास अभी इस सवाल का जवाब नहीं है कि इनमें से कितने हमास के लड़ाके हैं और कितने आम लोग।इजराइली सेना के मुताबिक वो हमास के 50 से ज्यादा टॉप कमांडरों को खत्म कर चुकी है।जंग से पहले हमास के पास 15 हजार रॉकेट्स का जखीरा था। इसमें 8100 से ज्यादा रॉकेट्स इजराइल पर दागे जा चुके हैं। अब भी सात हजार रॉकेट्स बचे हैं। 2008 की जंग के वक्त हमास के रॉकेटों की अधिकतम सीमा 40 किमी (25 मील) थी, लेकिन 2021 तक यह बढ़कर 230 किमी हो चुकी है।गाजा में 80 फीट की गहराई में बनी सुरंगें भी हमास के लिए किसी हथियार से कम नहीं हैं। हमास का प्लान था कि वो इजराइली सैनिकों को सुरंगों के जरिए घेर कर मारेंगे, ताकि इजराइल परेशान होकर जल्द सीजफायर का ऐलान कर दे।  इजराइल ने दावा किया है कि वो 100 ऐसी सुरंगों को तबाह कर चुका है। चार  नवंबर को इजराइली सेना के प्रवक्ता डेनियल हागरी ने  दावा किया  कि अब तक की जंग में गाजा अब दो हिस्सों में बंट चुका है। उत्तरी गाजा और दक्षिणी गाजा। उत्तरी गाजा में हम हमास का सफाया कर रहे हैं और दक्षिण में घायलों की मदद। अगर हमें लगता है कि दक्षिण में भी  कोई हमास लड़ाका है तो उसे भी मार गिराया जा रहा है। इससे साफ हो गया है कि जंग के 30 दिन पूरे होते-होते इजराइली सेना ने गाजा के दो टुकड़े कर दिए हैं। इतना ही नहीं, महीने भर की इस जंग ने फिलिस्तीन के नक्शे के अलावा हमास की ताकत और मुस्लिम देशों की सियासत को बदलकर रख दिया है। गाजा को हथियारों की सप्लाई ईरान और लीबिया से होती है।  इस्राइल काप्रयास इस आपूर्ति और हमास की आर्थिक  मदद रोकने का  होगा ताकि वह जल्दी हथियार डाल दे।


हमास की तैयारी को देखते हुए  लगता है कि वह जल्दी हार नही मानेगा। उसने हमला बहुत सोच समय कर किया होगा।उसने हमले से पूर्व उसके परिणाम पर गंभीरता के साथ  सोचा होगा।  जैसे  उसका हमला चौकाने वाला था, हो सकता है कि हमले के बाद इस्राइल से निपटने  की तैयारी भी चौंकाने  वाली हों।  ऐसे में युद्ध  कितना  लंबा चलेगा,  यह नही कहा जा सकता। 


अशोक मधुप


 (लेखक वरिष्ठ  पत्रकार हैं)

Saturday, November 4, 2023

प्रदूषण रोकने को जमीन से आक्सीजन क्यों नही उगाते?








 अशोक मधुप

वरिष्ठ  पत्रकार

 दिल्ली एनसीआर समेत 30 के आसपास नगर  आज बुरी तरह प्रदूषण की चपेट में हैं। बृहस्पतिवार के आंकडों के अनुसार दिल्ली की हवा  काफी  जहरीली हो गई है। इंडिया गेट, अक्षरधाम, रोहिणी, आनंद विहार समेत 13 इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 400 के ऊपर दर्ज किया गया। एक्यूआई 300 से ऊपर की रेंज बेहद खतरनाक कैटेगरी में मानी जाती है।हवा की क्वालिटी खराब होने पर कमीशन फॉर एयर क्वॉलिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने दिल्ली-एनसीआर में  में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के थर्ड स्टेज को लागू कर दिया। GRAP का स्टेज III तब लागू किया जाता है जब एक्यूआई 401-450 की सीमा में गंभीर हो जाता है।इसके चलते गैर-जरूरी निर्माण-तोड़फोड़ और रेस्टोरेंट में कोयले के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है। बीएस−3 पेट्रोल और बीएस−4डीजल चार पहिया वाहनों के इस्तेमाल पर सरकार ने 20 हजार रुपए चालान काटने का निर्देश दिया है।मुख्यमंत्री  अरविंद केजरीवाल ने पांचवीं क्लास तक के सभी सरकारी और प्राइवेट स्कूलों को शुक्रवार और शनिवार के लिए बंद करने का आदेश दिया है। दिल्ली में प्रदूषण पर अपोलो हॉस्पिटल के डॉ. निखिल मोदी ने लोगों को मास्क पहनने की सलाह दी है।प्रदूषण के कारण दिल्ली−एनसीआर  में  रहने वालों की अस्थमा जैसी बीमारी विकसित हो  रही हैं । प्रदूषण  बढ़ने से यहां रहने वालों की आयु कम हो रही है। सासें कम  हो रही हैं। हालत अन्य घनी आबादी वाले महानगरों की होती जा रही है। जाड़े शुरू होते ही सांसों पर संकट आ जाता है। दिल्ली एनसीआर में सरकारी  स्तर के प्रयास असफल होते देख  हर वर्ष सर्वोच्च  न्यायालय को दखल देना पड़ता है। सर्वोच्च  न्यायालय प्रदेश  सरकारों से प्रदूषणा रोकने के किए जा रहे उपाए पूछता है। प्रदेश  सरकार उपाय के नाम पर की गई  खानापूरी से अवगत करा देती हैं। मामला  अगले  साल के लिए टल जाता  है।अगले साल शीत का मौसम आते ही फिर प्रदूषण की समस्या खड़ी हो जाती है।प्रदूषण  की इस समस्या के स्थाई  निदान  के प्रयास क्यों  नही होतें? प्रदूषण  वाले क्षेत्र  में  आक्सीजन क्यों  नही उगाई  जाती। क्यों नहीं सांसों के लिए जमीन से आक्सीजन उगाने के प्रवंध होते।प्रदूषण  दूर करने के हमारे प्रयास कृत्रिम होते हैं।प्रकृति प्रदत्त संसाधन बढ़ाने की ओर हमारा ध्यान क्यों नहीं?इसके लिए हम अभियान क्यों नही चलाते?  

आक्सीजन उगाने का प्रयोग उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में एक भागीरथ  ने शुरू किया। पिछले तीन साल में बिजनौर में  इतनी आक्सीजन उगा दी कि  आने वाली सन्तति भी  उसका लाभ  उठाएंगी।   कोरोना  काल में आक्सीजन की कमी को लेकर मारामारी मची थी।  पूरी दुनिया  आक्सीजन के लिए  परेशान थी।आक्सीजन सिलेंडर पर भारी ब्लैक था।एक −एक सिलेंडर के लिए हाय− तौबा मची थी,तब उत्तर प्रदेश के राजस्व विभाग में कार्यरत बिजनौर नगर के विक्रांत  शर्मा  के मस्तिष्क में    जमीन से आक्सीजन उगाने का विचार आया।आइडिया   आया कि आज इंसान की सांसों  का संकट  है। सांसों के लिए आक्सीजन चाहिए।आक्सीजन को मशीन से पैदा करने की जगह जमीन से क्यों न पैदा किया जाए। इसके  लिए उन्होंने पढ़ा और सोचा कि  शहर के आसपास ऐसे  वृक्ष   लगाए जाएं जो  24 घंटे  आक्सीजन देतें  हो।बस  वह इस भगीरथ अभियान में लग गए।कोरोना  काल में जब लोग घरों में बंद थे। वे अपने बेटे को लेकर सवेरे रेलवे  लाइन और सड़क से  निकल  जाते। यहां  उन्हें  पीपल,  बरगद,  नीम आदि  के 24 घंटे आक्सीजन देने वाले जो  पौधे  दिखाई  देते,  उन्हें आराम से निकाल लेते।इन पौधों को  लाकर ये शहर की सड़कों के किनारे खाली जगह पर लगाने लगे।इनके इस कार्य को देख इनकी पत्नी  ने इन्हें पिट्ठू  बैग सिल  दिए।  अब ये  पौधे निकालते  और पिट्ठू  बैग में रख  लेते।विक्रांत शर्मा ने ये पौधे  लगाए ही नही। उन्हें पानी दिया और पाला भी। पौधों की सुरक्षा के लिए  ये  बांस खरीदते।उसकी खप्पच बनाते ।इन खप्पचों को पौधे के चारों और जमीन में गाड़कर ऊपर सबको आपस में बांध देते।पौधों की सुरक्षा के लिए उसके चारों ओर  पुराना  कपड़ा लगा  देते।इनके इस जुनून  को देख काफला बनना  शुरू हो गया।  इस काफले को इन्होंने नाम दिया  पर्यावरण  प्रहरी।आज इस काफले में 150 के  आसपास कार्यकर्ता हैं। 16 के आसपास महिलायें भी इस संगठन से  जुड़ी हैं।ये अपने− अपने क्षेत्र में खाली  जगह में पौधे  लगाते  हैं।उन्हें नियमित पानी देते  और देखभाल करते है।  इन पर्यावरण प्रहरियों ने  दो−ढाई किलोमीटर में बसे  बिजनौर शहर में आज साढे   चार हजार से कहीं  से ज्यादा  आक्सीजन देने वाले पौधे  लगा  दिए।  अकेले  इसी बरसात में एक हजार  से ज्यादा पौधे  रोपें।इनकी उपलब्धि यह है कि इनके लगाए 90  प्रतिशत पौधे  चल रहे हैं।  वे ही नही चले,जिन्हें किसी ने उखाड़ दिया  या जला दिया। । बीते रक्षाबंधन पर इन पर्यावरण प्रेमियों ने  नगर में संकल्प रैली निकाली। अपने लगाए  पौधों को रक्षा सूत्र बांधे और उनकी देखरेख तथा  सुरक्षा का  संकल्प  लिया।   ये पर्यावरण  प्रेमी  ग्रीष्मकाल में यह सेवा कार्य प्रातः 05:30 से 07:30 तक व शीत ऋतु में छह बजे से आठ बजे तक कम से कम दो घण्टे अवश्य करते  हैं। इस सेवा कार्य को इन्होंने प्रकृति वन्दन का नाम दिया गया है।सुबह सबेरे ये पर्यावरण  प्रेमी नियमित रूप से प्रकृति की सेवा में लगातें हैं।  उसके बाद अपने− अपने कार्य में लग जाते हैं। विक्रांत बताते  हैं  कि लगभग  तीन साल के अपने इस कार्य में उन्होंने पाया कि पीपल और बरगद प्रायः  जंगल  में नही मिलते।ये पुरानी बस्तियों में  बहुतायत ये पाए जातें  हैं। पुराने शहर और पुराने भवन में पीपल, बरगद और नीम के पौधों का  बहुतायात ये मिलने का कारण संभवतःउस क्षेत्र में आक्सीजन की कमी का होना  है।प्रकृति शायद इस कमी को महसूस  करती है।इन हर समय  आक्सीजन देने   वाले पौधों को उसी पुरानी आबादी में उगाती है।

जो काम बिजनौर शहर में विक्रांत शर्मा ने अकेले किया। वहीं काम सरकारी स्तर पर क्यों नही होता।  सरकार  प्रत्येक वर्ष  बरसात में पौधरोपण  करती हैं। करोड़ों पौधे  लगाती हैं।यदि  इनकी जगह  24 घंटे  आक्सीजन देने वाले पौधे  लगाए जांए तो कितना  बेहतर हो।सड़कों के डिवाइडर पर हम शो  के फूल वाले  पौधे लगाते हैं।इस जगह यदि  24 घंटे ऑक्सीजन  देने  वाले  आमरिका बाम, एलोवेरी, तुलसी, वाइल्ड जरबेरा, स्नेक प्लांट, आरकिड, क्रिसमस केक्टस लगांए तो ज्यादा बेहतर रहेगा। नोयडा में  कुछ मार्ग पर पीपल  लगाने का  काम हुआ  भी है। गर्मी के दिनों में बरगद छाया के साथ ठंडक प्रदान करता है। वट वृक्ष दिन ही नहीं, बल्कि रात में भी ऑक्सीजन उत्सर्जित करता है। वट वृक्ष में फैलाव अधिक होने के चलते ऑक्सीजन अधिक मात्रा में मिलती है। इसके अलावा वैज्ञानिक और धार्मिक दृष्टिकोण से वट वृक्ष यानि बरगद के पेड़ का विशेष महत्व है। विज्ञानियों का कहना है कि बरगद पेड़ अन्य पेड़-पौधे की अपेक्षा चार-पांच गुना अधिक ऑक्सीजन देता है। शुद्ध हवा और प्रकृति ऑक्सीजन से शरीर निरोगी रहता जिस जगह बरगद पेड़ होता है उसके आसपास के 200 मीटर का क्षेत्र ठंडा रहता है।  24 घंटे आक्सीजन देने वाले आमरिका बाम, एलोवेरी, तुलसी, वाइल्ड जरबेरा, स्नेक प्लांट, आरकिड, क्रिसमस केक्टस को सोसायटी,  कॉलोनी, बस्ती के संकरे  रास्ते घर  के आसपास ,मकान की छतों  पर भी  लोगों को  लगाने के लिए प्रेरित किया  जाना  चाहिए। इन जगह के रहने वालों को  इन पौधों को लगाने के  लाभ  बतांए  जांए।कुछ एनजीओ को भी  इस कार्य के लिए प्रेरित किया जा सकता है।राजकोट गुजरात में एक वृद्धाआश्रम सेवा   समिति  इस कार्य में लगी हैं।  ये डिवाइडर पर भी  सहजन के  आठ− दस  फिट के पौधे  लगा रही है।    

एक बात और  विकास के नाम पर पेड़  काटें  न जाए।उनको  शिफ्ट किया जाना चाहिए।  इसके कार्य  में  कर्नाटक  आदि में कुछ कंपनी लगी भी है।  सड़को को चौड़ा करते समय किनारे  के पेड़  डिवाइडर पर लगाए जा सकतें हैं।

जाड़ों में आने  वाले  सांसों के संकट का खत्म करने के लिए आक्सीजन उगाने और नगरों को  आक्सीजन बैंक  में बदलना  होगा। ये भी ध्यान रहे कि आज का लगाया  पौधा  आगे 50−60  साल तक जीवित रहकर जनता को मुफ्त में आक्सीजन देगा। पीपल, बरगद और नीम की आयु तो  अन्य वृक्षों से  और भी ज्यादा होती है।  हमारा आजका  लगाया  पौधा हमारी आने  वाली पीढ़ियों   को भी  भरपूर  आक्सीजन देता रहेगा।

अशोक मधुप

(लेखक वरिष्ठ  पत्रकार हैं)





Monday, October 30, 2023

देश के आम आदमी की चिंता कौन करेगा?

 देश के आम आदमी की चिंता कौन करेगा?

अशोक मधुप

वरिष्ठ  पत्रकार

आवारा पशुओं के कारण  देश में दुर्घटनाएं बढ रही हैं।इन दुर्टनाओं में बड़ी तादाद में वाहन चालक या पैदल मर रहे हैं। मरने से कई गुना  ज्यादा घायल हो रहे हैं किंतु किसी को  इनकी चिंता नही। चिंता है  तो  सड़कों और गली में घूमने  वाले  आवारा पशुओं की । जब भी सड़क के  इन पशुओं के विरूद्ध  कार्रवाई  की बात होती है, तो इन पशुओं के कल्याण  में लगे  संगठन विरोध में उतर आते हैं।वे सड़क के पशुओं की बात करते हैं।उनकी चिंता  करते  हैं।इनसे टकराकर मरने और घायल होने  वालों की चिंता किसी को  नहीं। आखिर सड़क पर चलने  वाले पैदल या वाहन चालक की सुरक्षा  और  उसके अधिकार की भी कौन करेगा?उनकी भी तो बात होनी चाहिए। उनकी सुरक्षाकी चिंता भी की जान चाहिए।उनकी हिफाजत की भी तो  चिंता की जानी चाहिए।

दो साल पुरानी सरकारी जानकारी के अनुसार देश में 2.03 करोड़ लावारिस पशु हैं।इनके हमले से हर दिन तीन व्यक्तियों की मौत  होती है। 3 साल में 38,00 लोगों ने गंवाई।  देश में आवारा पशुओं के हमलों से रोजाना होने वाली मौतों को लेकर केंद्र सरकार ने फरवरी में एक रिपोर्ट तैयार की। साल 2019 की गणना के हिसाब से देश में आवारा पशुओं की संख्या 2.03 करोड़ आंकी गई है।देश के महानगरों में सड़क दुर्घटनाओं का एक प्रमुख कारण आवारा कुत्ते, गाय और चूहे जैसे जानवर  हैं। यह बात अग्रणी टेक-फर्स्ट बीमा प्रदाता कंपनी एको की ‘एको एक्सीडेंट इंडेक्स 2022’ रिपोर्ट में सामने आई ।रिपोर्ट के अनुसार, देश में सड़क दुर्घटनाओं का मुख्य कारण जानवर थे, खासकर चेन्नई में जानवरों के कारण सबसे अधिक तीन प्रतिशत से ज्यादा दुर्घटनाएं दर्ज हुई हैं।इसमें कहा गया है कि दिल्ली और बेंगलुरु में जानवरों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं की संख्या दो प्रतिशत थी। देश के महानगरों में जानवरों के कारण होने वाले दुर्घटनाओं में कुत्तों के कारण 58.4 प्रतिशत तथा इसके बाद 25.4 प्रतिशत दुर्घटनाएं गायों के कारण हुईं।रिपोर्ट के अनुसार, ‘आश्चर्यजनक बात यह है कि चूहों के कारण 11.6 प्रतिशत दुर्घटनाएं हुईं।कंपनी के  अनुसार, इस दुर्घटना सूचकांक में बेंगलुरु, चेन्नई, दिल्ली, हैदराबाद, और मुंबई सहित मुख्य महानगरों में हुई दुर्घटनाओं का विवरण दिया गया है। ये कागजी आंकड़े हैं।ये  महानगरों के हालात हैं।  गांव  में  इन दुर्घटनाओं में मौत और घायलों का आंकड़ा  और भी कई गुना ज्याद होगा।

अभी देश की प्रमुख चाय कंपनियों में से एक वाघ बकरी चाय के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर पराग देसाई का निधन हो गया है। मीडिया खबरों के मुताबिक 49 साल के पराग पिछले हफ्ते अहमदाबाद में मॉर्निंग वॉक पर निकले थे। इस दौरान आवारा कुत्तों ने उन पर हमला कर दिया। खुद को बचाने में वह फिसलकर गिर गए और उन्हें ब्रेन हेमरेज हो गया था। उनका अहमदाबाद के एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था। ये बड़े  आदमी थे,  इसलिए  खबरों में आ गए, गांव देहात में तो कोई  इस और ध्यान भी नही देता। हाल में उत्तर प्रदेश के  मथुरा में एक बच्चे  को गाय ने हमला  करके  घायल कर दिया ।

उत्तर प्रदेश  के पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह भी मानते हैं कि उत्तर प्रदेश में चार लाख से ज्यादा आवारा पशु हैं, जिन्हें अभी गौशाला भेजना बाकी है।  हालाकि गौशालाओं में  पहले ही दो  लाख से ज्यादा गौंवश  मौजूद है। हरियाणा में सड़कों पर घूम रहे गोवंश के कारण रूप में हर माह 10 लोग जान  गंवा रहे हैं।

भारत सरकार के स्वास्थ्य एंव परिवार कल्याण मंत्रालय ने पिछले साल संसद में हुए एक सवाल का जवाब देते हुए बताया था कि 2019, 2020, 2021 और 2022 में देश में लोगों पर कुत्तों के कुल कितने हमले हुए हैं। इस जवाब के अनुसार, साल 2019 में 72 लाख 77 हजार 523 कुत्तों के हमले रिपोर्ट हुए। वहीं साल 2020 में कुल 46 लाख 33 हजार 493 कुत्तों के हमलों  रिपोर्ट हुए, जबकि साल 2021 में कुल 1701133 कुत्तों के काटने के मामले रिपोर्ट हुए।

वहीं साल 2022, जुलाई तक भारतीय लोगों पर हुए कुत्तों के हमले की कुल संख्या स्वास्थ्य एंव परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार, 14 लाख 50 हजार 666 थी। इन हमलों में कई लोगों ने अपनी जान भी गंवाई है। ये हमले आवारा और पालतू दोनों कुत्तों के हैं। इसके साथ ही इन हमलों के शिकार, बच्चे, बुजुर्ग और जवान तीनों हुए हैं।

आवारा कुत्तों के काटने से आपको रेबीज नाम की बीमारी हो जाती है। ये बीमारी इतनी घातक होती है कि अगर समय पर इसका इलाज नहीं कराया गया तो मरीज की मौत भी हो सकती है।  साल 2018 में मेडिकल जर्नल लैंसेट में छापी  इस रिपोर्ट में कहा गया था कि भारत में हर साल 20 हज़ार लोग रेबीज के कारण मरते हैं. इनमें से ज्यादातर रेबीज के मामले कुत्तों द्वारा इंसानों तक पहुंचे हैं।ऐसा नहीं है कि हर कुत्ते के काटने से आपको रेबीज हो सकता है, लेकिन ज्यादातर आवारा कुत्तों के काटने से रेबीज का खतरा रहता है।  कुत्तों के  इन हमलों के सबसे ज्यादा शिकार छोटे बच्चे और जवान होते  हैं।

दिल्ली  और  मध्य प्रदेश  समेत कई  राज्यों में तो हिंदुओं के गाय  प्रेम  का पशुपालक अनुचित लाभ  उठा रहे हैं।  वे सवेरे दूध  निकालकर अपने  पालतू गाय को चरने के लिए  खुला  छोड़  देते  हैं।ये गाय   सड़क और गलियों में घूमकर  अपना पेट भरते  हैं।कई  बार नागरिक इनके हमले के शिकार हो जाते  हैं। पालतू कुत्ते  भी  मालिकों की लापरवाही के कारण लोगों पर हमले करते रहते हैं।      

दो साल पहले केंद्र सरकार ने निर्देश  दिए थे कि आवारा पशुओं जिनमें गौवंश और विशेष तौर पर कुत्ते शामिल हैं, उन्हें पकड़ कर पशु चिकित्सक द्वारा पशु पालन विभाग के अधिकारियों की देखरेख में मेडिकल जांच कराने और बीमार होने पर इलाज कराने को कहा गया है। उन्हें अलग- अलग संक्रामक बीमारियों से बचाने के लिए अनिवार्य वैक्सीनेशन कराने के लिए भी कहा गया है। वैक्सीनेशन पशुओं के माध्यम से इंसानों को होने वाले संक्रमण से भी बचाएगा।

राज्यों को यह भी कहा गया है कि वह ऐसे लोगों की पहचान करें, जो बीमार या काम लायक न रहने पर अपने पशुओं को बेसहारा छोड़ देते हैं। ऐसे लोगों पर कार्रवाई की जाए। कानून के तहत ऐसे मामलों में 6 महीने से लेकर 1 साल तक की सजा का प्रावधान है।राज्यों को पशु हेल्पलाइन बनाने के निर्देश
राज्यों को शिकायत तंत्र और पशु हेल्पलाइन बनाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही कहा गया कि कोई आवारा पशु जैसे कुत्ता पागल हो गया है तो उससे रेबीज की मात्रा अधिक मिलती है, तो उसे तब तक अलग रखा जाए, जब तक उसकी मौत न हो जाए। आवारा कुत्ते को संक्रामक बीमारी है और एक पशु से दूसरे पशु या इंसानों में होने का खतरा है और इलाज संभव नहीं है, तो ऐसे संक्रमित जानवरों को शांतिपूर्ण तरीके से खत्म करने के भी निर्देश दिए गए हैं।केंद्र  के ये निर्देश ,निर्देश  ही बन कर रह गए। किसी को इनके क्रियान्वयन का ध्यान  नही आया। 

आवारा गौवंश  के लिए  उत्तर प्रदेश में सरकारी स्तर पर गौशालाएं खोली गई  हैं।ये  गौशालाएं  नगर निगम ,  नगरपालिका  और नगर पंचायत  स्तर पर खुली हैं।आवारा गौवंश पकड़कर इनमें रखा  जाता है।  इन गौशालाओं की जगह पशुशाला खुलनी चाहिएं। इनमें गाय, बैल,गधा,घोड़ा कुत्ता, बिल्ली जैसे आवारा पशु पकड़कर रखे  जांए। देश की नगर ,गांव और सड़कें आवारा पशुओं से  बिल्कुल मुक्त  होनी चाहिए। ऐसा होगा तो आम अदमी और वहन चालक गली, मुहल्लों,  नगरों  और सडकों पर सुरक्षित होंगे।       

अशोक मधुप

( लेखक वरिष्ठ  पत्रकार हैं)

Friday, October 27, 2023

पेंटागन की रिपोर्ट के अनुरूप भारत को तैयार कीजिए

पेंटागन की रिपोर्ट के अनुरूप भारत को तैयार कीजिए अशोक मधुप वरिष्ठ पत्रकार अमेरिकी रक्षा विभाग के मुख्यालय पेंटागन नई रिपोर्ट चौंकाने वाली है।भारत के लिए ये चिंताकर है। भारत चीन सीमापर रिपोर्ट चीन की युद्ध तैयारी का खुलासा करती है। साथ ही इस बात का संकेत है कि भारत को अपनी सुरक्षा को बहुत मजबूत करना होगा। अपने बूते पर मजबूत करना होगा। स्वदेशी तकनीक से मजबूत करना होगा।अपने को इस तरह ढालना होगा कि एक साथ दो देशों से युद्ध की स्थिति का वह मजबूती के साथ मुकाबला कर सके। अमेरिकी रक्षा विभाग के मुख्यालय पेंटागन नई रिपोर्ट भारत के सचेत करने के लिए है। इसमें कहा गया है कि चीन भारत से लगी सीमा एलएसी (लाइन आफ एचुअल कंट्रोल )पर बड़े स्तर पर जंग की तैयारी कर रहा है।पेंटागन की रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन एलएसी पर अपने सैन्य जमावड़े को कम नहीं कर रहा है। बल्कि बदले वह अपनी सैन्य क्षमता बढ़ा रहा है। वह सीमा पर इन्फ्रास्ट्रक्चर बढ़ा रहा है। परमाणु हथियार से लेकर लॉन्ग रेंज बैलिस्टिक मिसाइल की क्षमता में इजाफा कर रहा है। चीन एलएसी के पास अंडरग्राउंड स्टोरेज सुविधा, सड़क, दोहरे इस्तेमाल वाले गांव, एयर फिल्ड और हेलीपैड बना रहा है।चीन युद्ध के सभी डोमेन में अपनी सेना को सक्रिय रूप से आधुनिक बना रहा है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग का लक्ष्य 2049 तक चीन की सेना को विश्व-स्तरीय बनाने का है। चीन ने 3,488 किलोमीटर लंबे एलएसी के पास अपनी सेना को 2023 में भी तैनात रखा। चीन ने एलएसी के पश्चिमी क्षेत्र (लद्दाख) में शिनजियांग और तिब्बत सैन्य जिलों के डिवीजनों द्वारा समर्थित सीमा रेजिमेंटों को तैनात किया है। ये बल टैंक, तोपखाने, एयर डिफेंस मिसाइल और अन्य हथियारों से लैस हैं। इसके अतिरिक्त, चीन ने पूर्वी (सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश) और सेंट्रल (उत्तराखंड, हिमाचल) क्षेत्रों में लाइट-टू-मेडियम संयुक्त-आर्म्स ब्रिगेड (सीएबीएस) को तैनात किया है। चीन के डोकलाम के पास भूमिगत भंडारण सुविधाएं तैयार की है। वह एलएसी के पास नई सड़कें बना रहा है। चीन ने भूटान में विवादित क्षेत्रों में नए गांव बसाए हैं। उसने पंगोंग झील पर दूसरा पुल तैयार किया है। इसके साथ ही हवाई अड्डे और कई हेलीपैड तैयार किए हैं। दोनों देशों की सेनाएं लगभग तीन साल से आधुनिक शस्त्रों के साथ आमने−सामने हैं। भारत और चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पार पूर्वी लद्दाख सेक्टर में 50,000 से अधिक सैनिकों को तैनात किया है। कई जगह तो वह बहुत ही नजदीक हैं। भारत चीन के बीच सीमा विवाद का कोई हल नहीं निकल रहा। सीमा पर तनाव होने के बावजूद शांति है। तीन साल पहले हुए गलवान घाटी संघर्ष के और बाद में 2022 में अरुणाचल के तवांग घाटी में बाद कोई घटना नहीं हुई। यह सब बहुत ही अच्छा है। लेकिन चीन के इरादे कुछ और कहतें हैं। उसकी तैयारी कुछ और इशारा करती हैं।हालाकि वह पहले भी कभी ऐसा पड़ौसी नही रहा, जिसका यकीन किया जा सके, जिस पर विश्वास किया जा सके। दूसरे अमेरिकी रक्षा विभाग के मुख्यालय पेंटागन की नई रिपोर्ट अब आई है किंतु सीमा के हालात से भारत वाकिफ नही होगा, ऐसा नही लगता।उसे भी सब पता होगा। आज दुनिया के हालात बहुत बदले हुए हैं।भारत का संकट का मित्र रूस यूक्रेन युद्ध में फंसा हुआ। अमेरिका और मित्र देश यूक्रेन की शस्त्र आदि से पूरी मदद कर रहे हैं।ऐसे हालात में रूस और चीन की नजदीकी बढ़ रही है।ऐसे में चीन से युद्ध में रूस हमारे साथ आएगा, ऐसा नही लगता।उसे तो यूक्रेन युद्ध में अपनी फंसी टांग निकालने से ही समय नही मिल रहा।हालाकि आज अमेरिका का रवैया बता रहा है कि वह भारत के साथ है किंतु वह कभी विश्वसनीय मित्र नही रहा। यहीं हाल उसके मित्र देश कनाडा आदि का है।कनाडा से तो एक सिख आतंकी की कनाड़ा में मौत के बाद भारत के रिश्ते काफी खराब हुए हैं। अमेरिका और उसके कई मित्र देश भारत के फरार और इनामी आंतकियों को शरण दिए हुए हैं।हालांकि चीन के मुकाबले के लिए अमेरिका को भारत की बड़ी जरूरत है। वह मानता है कि चीन की आक्रामकता का मुकाबला करने के लिए उसे भारत का साथ चाहिए।किंतु अमेरिका ड़ेढ साल से ज्यादा समय से रूस के साथ चल रहे यूक्रेन के युद्ध में सभी तरह से यूक्रेन की मदद कर रहा है। अब उसके मित्र देश इस्राइल और हमास में युद्ध शुरू हो गया। यहां भी उसे इस्राइल की शस्त्रों आदि से मदद करनी पड़ रही है। इस्राइल हमारा मित्र देश है किंतु वह खुद युद्ध में लगा है।ऐसे में संकट में हमें इन सबसे मदद की उम्मीद नही करनी चाहिए। युद्ध के लिए हमें युद्ध का अपने बूते पर अपनी तकनीक से मुकाबला करना होगा।हालाकि वर्तमान हालात में जबकि अमेरिका यूक्रेन और इस्राइल में फंसा है, चीन के लिए अच्छा अवसर है कि वह वियतनाम पर कब्जा करले। वियतनाम पर वह काफी समय से गिद्ध दृष्टि लगाए है। बार बार वियतनाम के पास युद्धाभ्यास करने में लगा हुआ है। जो भी हो चीन की तैयारी हमें यह बताने के लिए काफी है, कि उसका कोई भरोसा नही किया जा सकता। दूसरे दुनिया की दो शक्तियां अमेरिका और रूस यूक्रेन में लगी हैं। अब अमेरिक इस्राइल में फंस गया । दुनिया की तीसरी शक्ति चीन अभी शांति के साथ अपने को मजबूत करने में लगा है। उससे भारत के लिए सदा सचेत रहने और उससे युद्ध के लिए अपने को तैयार करने के लिए लगे रहना होगा। भारत का इसके लिए भी तैयार रहना होगा, कि चीन के साथ युद्ध की हालत में चीन का मित्र देश पाकिस्तान भी भारत के खिलाफ मोरचा खोल सकता है।इसे देखते हुए एक साथ दो मोरचों पर युद्ध के लिए तैयार करना होगा। अब तक चीन का रवैया युद्ध करना नहीं, युद्ध का हौवा खड़ा करके सामने के देश पर दबाव बनाकर लाभ उठाना रहा है। किंतु इस बार वह अपनी इस रणनीति में कामयाब नही हो पा रहा। चीन ने भारत सीमा पर सेना बढ़ाई तो भारत ने भी सीमा पर सैना तैनात कर दी। इतना ही नहीं भारत ने आधुनिक तोप और लड़ाकू विमान भी तैनात कर दिए हैं। चीन से बात करने के लिए सामने वाले का मजबूत होना और सीना तान कर सामने खड़ा होना जरूरी है। आज भारत इस हालत में है। उसने स्पष्ट भी कर दिया है कि भारत अपने हितों की रक्षा के लिये तैयार है। पूरा देश जानता है कि चीन हमारा दुश्मन है, कभी दोस्त नहीं हो सकता। इसके बावजूद सस्ते के लालच में हम चीन का बना सामान खरीद रहे हैं। हममें देशभक्ति सिर्फ सोशल मीडिया पर नजर आती है। फेसबुक पर नजर आती है, व्हाटसएप पर नजर आती है, इंस्ट्रागाम पर दिखाई देता है। व्यवहार में ऐसा नहीं है। चीन के सीमा पर सेना तैनात करने के बाद से चीनी सामान बहिष्कार का आंदोलन इस तरह चला था कि लगता था कि कोई भारतीय चीन का बना सामान नहीं खरीदेगा। किंतु हो इसके विपरीत रहा है। इस साल की पहली छमाही में भारत को चीन का निर्यात 56.53 अरब डॉलर का रहा। यह एक साल पहले के 57.51 अरब डॉलर से 0.9 फीसदी कम है। चीनी कस्टम्स द्वारा जारी आंकड़ों से यह जानकार मिली है। वहीं, चीन को भारत का निर्यात इस अवधि में कुल 9.49 अरब डॉलर रहा। यह एक साल पहले 9.57 अरब डॉलर रहा था। इस तरह साल 2023 की पहली छमाही में व्यापार घाटा एक साल पहले के 67.08 अरब डॉलर से घटकर 47.04 अरब डॉलर रह गया। पिछला साल भारत-चीन व्यापार के लिए बंपर ईयर रहा था। यह पिछले साल 135.98 अरब डॉलर के ऑल टाइम हाई पर पहुंच गया था। साल 2022 में कुल भारत-चीन व्यापार 8.4 फीसदी की बढ़त के साथ एक साल पहले के 125 अरब के आंकड़े को पार कर गया था। व्यापारी चीन से माल खरीदकर बेचने से बाज नही आ रहा और जनता सस्ते के लालच में उसे खरीद रही है, ऐसे में सरकार को चाहिए कि चीन से आने वाले सामान पर आयात शुल्क ज्यादा लगाकर और चीन से आ रहा सामान देश में बनाकर चीन से आयात कम करना होगा। भारत को वर्तमान हालात में अपने को युद्ध के लिए, आने वाले युद्ध की चुनौती के लिए युद्ध स्तर पर अपने को तैयार करना होगा। अपने को मजबूत बनाना होगा। घर में बैठे गद्दारों से सचेत रहना होगा।हालाकिं भारतीय सुरक्षा एजेंसियां इसमें लगातार लगी है।किंतु जरासी चूक और लापरवाही देश को भारी पड़ सकती है। अशोक मधुप (लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)

Tuesday, October 17, 2023

निठारी कांड के निर्णय पर गूंजते सवाल

निठारी कांड के निर्णय पर गूंजते सवाल अशोक मधुप वरिष्ठ पत्रकार इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के नोएडा के चर्चित निठारी कांड के 12 केस के आरोपी सुरेंद्र कोली और दो केस में फंसी की सजा पाए कोठी डीएस−5 के मालिक मनिंदर सिंह पंढेर को भी ने बरी कर दिया है। शायद यह एतिहासिक होगा कि एक साथ 12 मामलों में फंसी के आरोपी को बरी किया गया हो। न्यायालय ने इन्हें दोष मुक्त तो करार दे दिया। किंतु ये न्याय एक तरफा है। अधूरा है।निठारी कांड तो हुआ है।चर्चित निठारी कांड में निचली अदालत से कोली को एक दर्जन से अधिक मामलों में फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है। निठारी गांव के कोठी डीएस−5 के मालिक मनिंदर सिंह पंढेर को दो केस में फंसी की सजा हो चुकी है।अब जब की ये निचली अदालत से फांसी की सजा पाए ये दोनों आरोपी हाईकोर्ट ने बरी कर दिए तो व्यवस्था को यह तो बताना ही होगा कि फिर इस कांड के आरोपी कौन हैं? किसने इस कांड की 19 घटनाओं को अंजाम दिया। कांड तो हुआ ही है।ये दोंनों आरोपी इसलिए बरी हो गए कि इनके विरूद्ध सुबूत नही थे। किंतु पीड़ित परिवार को भी तो न्याय चाहिए।उनके परिवार की युवतियों, बेटियों बच्चों पर जुल्म करने वाला, उनसे व्यभिचार कर उन्हें काटकर खाने वाला कोई तो होगा? किसी ने तो ये कांड किया होगा? उसे कानून की जद में लाकर सजा कौन दिलाएगा? ये निर्दोष थे तो फिर इनकी कोठी के पास नाले में किसने मारकर इनको डाला? इस मामले में कई दिनों तक चली बहस के बाद अदालत ने सोमवार को हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने सुरेंद्र कोली को दोषमुक्त कर दिया। निचली अदालत ने उसे फांसी की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ उसने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। कोठी D-5 के मालिक मनिंदर सिंह पंढेर को भी कोर्ट ने बरी कर दिया है। न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति एसएएच रिजवी की अदालत ने यह फैसला सुनाया। कोली पर आरोप है कि वह पंढेर कोठी का केयरटेकर था और लड़कियों को लालच देकर कोठी में लाता था। निठारी गांव की दर्जनों लड़कियों गायब हो गईं। वह उनसे दुष्कर्म कर हत्या कर देता था। लाश के टुकड़े कर बाहर फेंक आता था। 29 दिसंबर 2006 को नोएडा में मोनिंदर सिंह पंढेर के घर के पीछे नाले से 19 बच्चों और महिलाओं के कंकाल मिले। मोनिंदर सिंह पंढेर और सुरेंद्र कोली गिरफ्तार किया।आठ फरवरी 2007 को कोली और पंढेर को 14 दिन की सीबीआई हिरासत में भेजा गया।मई 2007 को सीबीआई ने पंढेर को अपनी चार्जशीट में अपहरण, दुष्कर्म और हत्या के मामले में आरोपमुक्त कर दिया था। दो माह बाद अदालत की फटकार के बाद सीबीआई ने उसे मामले में सहअभियुक्त बनाया।13 फरवरी 2009 को विशेष अदालत ने पंढेर और कोली को 15 वर्षीय किशोरी के अपहरण, दुष्कर्म और हत्या का दोषी करार देते हुए मौत की सजा सुनाई। ये पहला फैसला था।इसके बाद 11 केस में दोनों को सजा हुई। पुलिस ने इस मामले में कहा था कि कम से कम 19 युवा महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया था, उनकी हत्या कर दी गई थी और उनके शवों के टुकड़े-टुकड़े कर दिए गए थे। पुलिस ने उस समय कहा था कि ये हत्याएं पंढेर के घर के अंदर हुई थीं, जहां कोली नौकर के तौर पर काम करते थे।पुलिस ने आरोप लगाया कि जिन बच्चों के अवशेष बैग में छिपे हुए पाए गए थे, उन्हें कोली ने मिठाई और चॉकलेट देकर लालच देकर मार डाला था।पुलिस का कहना था कि जांच के दौरान कोली ने नरभक्षण और नेक्रोफिलिया (शवों के साथ संबंध बनाने) की बात कबूल की थी। बाद में उन्होंने अदालत में अपना कबूलनामा ये कहते हुए वापस ले लिया कि उनसे जबरन ये बयान दिलवाया गया था।सीबीआई ने सुरेंदर कोली और पंढेर के खिलाफ़ 19 मामले दर्ज किए थे। जहां कोली पर हत्या, अपहरण, बलात्कार, सबूतों को मिटाने जैसे आरोप थे तो वहीं पंढेर पर अनैतिक तस्करी का आरोप था।इस मामले की गूंज कई सालों तक देश गूंजती रही थी। लोगों ने पुलिस पर लापरवाही बरतने के आरोप लगाए थे. स्थानीय लोगों ने उस समय कहा था कि पुलिस इस मामले में इसलिए भी कार्रवाई नहीं कर सकी क्योंकि लापता होने वालों में से अधिकतर गरीब परिवार के थे. गाज़ियाबाद जेल में बंद कोली को इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा सुनवाई किए जा रहे 12 मामलों में मौत की सज़ा सुनाई गई थी। वहीं पंढेर नोएडा की जेल में बंद हैं और उन्हें दो मामलों में मौत की सज़ा हुई थी।कोली की सज़ा को उम्रकैद में बदलने वाले हाईकोर्ट के आदेश को उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। अभी ये मामला शीर्ष न्यायालय में लंबित है। न्यायालय ने निर्णय में ये माना कि आरोपियों के विरूद्ध सबूत नही हैं। न्यायालय ने ये नही कहा कि कांड हुआ ही नही।कांड तो हुआ। 19 महिलाओं और बच्चियों के कंकाल कोठी डीएस−5 के सामने नाले से मिले। अब प्रश्न यह है कि ये नही तो किसी और ने ये कांड किया है।जिसने कांड किया उसे सजा दिलाने की किसकी जिम्मेदारी है? किंतु लगता है कि न्यायालय ने इस केस के आरोपी के बरी हो जाने के बाद ये केस व्यवस्था की कबाड़ की फाइल में चला जाएगा। 2006 से न्याय की आशा में बैठे पीडित परिवार को रो पीट कर चुप हो बैठना पड़ेगा ।इस निर्णय के बाद पीड़ितों के माता पिता और परिवार वालों का दुख और गहरा हो गया। अपनों को खोने वालों ने कहा कि 17 साल बाद भी हम लोगों को न्याय नहीं मिला। निठारी कांड में अपने बच्चों को खोने वाले पैरंट्स का लगभग एक ही सवाल है कि अगर पंढ़ेर और कोली निर्दोष हैं तो उनके बच्चों को किसने मारा है? एक बात और हाईकोर्ट ने कहा कि शवों की मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर जांच नही हुई।ये रिपोर्ट मानव तस्करी की और इशारा कर रही थी।दोनों न्यायधीश ने जांच पर नाखुशी जताते हुए ये भी कहा कि जांच बेहद खराब है। सुबूत जुटाने की मौलिक प्रक्रिया का पूरी तरह उल्लंघन किया गया। जांच एसेंसियों की नाकामी जनता के विश्वास के साथ धोखा है। हाईकोर्ट ने कहा कि जांच एजेंसियों ने अंग व्यापार के गंभीर पहलुओं की जांच किए बिना एक गरीब नौकर को खलनायक की तरह पेश किया। हाईकोर्ट ने माना कि ऐसी गंभीर चूक के कारण मिलीभगत सहित कई गंभीर निष्कर्ष संभव है। हाईकोर्ट ने यह भी माना कि आरोपी अपील कर्ता को निचली अदालत में स्पष्ट रूप से निचली अदालत में सुनवाई का मौका नही मिला। न्यायालय ने निर्णय में ये भी कहा कि दोनों आरोपियों के खिलाफ कोई सुबूत नही हैं।सुबूत के अभाव में दोनों आरोपियों को लगभग 17 साल जेल में रहना पड़ा।अकारण जेल में बिताए इनके इन सालों के लिए कौन जिम्मेदार है? इस केस में शुरूआत से ही पुलिस पर आरोप लगते रहते हैं कि वह इस मामले में रूचि नही ले रही।उसीके बाद मामला सीबीआई को गया। अब सीबीआई की जांच पर भी सवाल उठा है तो सीबीआई को अपनी जांच और प्रक्रिया पर भी सोचना और बदलाव करना होगा। क्योंकि देश में उसका बहुत सम्मान है। प्रत्येक प्रकार के टिपिकल मामले में उसी से जांच कराने की बात आती है। अब उसकी भी जांच ऐसी ही निम्न स्तरीय होगी,तो फिर उसे सोचना तो होगा ही। अशोक मधुप

Saturday, October 14, 2023

कन्याओं को पूजिए ही नही, उन्हें आत्मसुरक्षा भी सिखाइये

कन्याओं को पूजिए ही नही, उन्हें आत्मसुरक्षा भी सिखाइये अशोक मधुप शारदीय नवरात्रि का आरंभ रविवार 15 अक्टूबर 2023 से हो रहा है।नवरात्र में अधिकांश हिंदू परिवार घर में मां के कलश की स्थापना करते हैं।इन नौ दिन उपवास रखकर देवी के विभिन्न रूपों की पूजा की जाती है।देवी स्परुपा कन्याओं को पूजा जाता है।उन्हें जिमाया जाता है। वस्त्रादि भेंट किए जाते हैं। उपहार दिए जाते हैं। ये परंपरा सदियों से चली आ रही है।सदियों से चली आ रही इस परम्परा में वक्त के हिसाब से अब सुधार की जरूरत है। आज जरूरत है कि हम कन्याओं को पूजे और जिंमाए ही नहीं।उन्हें शिक्षित करें।उन्हें आत्मसुरक्षा भी सिखाए।उन्हें गुड टच और बेड टच से अवगत भी करांए। कन्याओं को आज के समाज में शान और सम्मान के साथ जीने के योग्य बनांए। ज्यादती के खिलाफ बोलना भी बतांए।इतनी ही नही बेटियों को सुरक्षा का वचन दें।शपथ लें कि गर्भ में बेटियों को नही मारेंगे। बेटी व्यक्ति विशेष की होने के साथ ही समाज की होती हैं। वचन लें आपदा में प्रत्येक बेटी की मदद करेंगे। नवरात्र देश भर में अलग −अलग रूप में मनाए जाते हैं।पूजा अर्चन की जाती है।सबका तात्पर्य यह ही है कि देवी शक्ति की पूजा कर हम उनसे अपने और समाज के कल्याण का आशीर्वाद मांगे।स्वस्थ समाज की मांग करें।ये सब कुछ सदियों से चला आ रहा है। आज समय की मांग है कि हम आगे बढ़े।वक्त की जरूरत के साथ परिवर्तन करें। आज देश की देवियां ,महिलाएं, मातृशक्ति विकास के हर क्षेत्र में अपना योगदान कर रही हैं।कार तो बहुत समय से चलाती रही हैं। अब ये आटो, ट्रक,ट्रेन ,मालगाड़ी भी चलाने लगीं हैं।ये प्लेन उड़ा रही हैं। अब तो सेना में जाकर बार्डर की हिफाजत भी महिलाएं कर रही हैं। आधुनिकतम लड़ाकू विमान भी उड़ा रहीं हैं। उन्हें निंयत्रित कर रही हैं। कभी गाना , बजना, नाचना महिलाओं की कला थी। उसमें उन्हें पारंगत करने के साथ− साथ पुराने समय से परिवार की बेटियों को सिलाई, कढ़ाई, बुनाई,अनाज पिसाई,छनाई के साथ घर के कामकाज सफाई,भोजन बनाने में आदि में निपुण किया जाता था। ताकि वह समय की जरूरत के हिसाब के शादी के बाद अपने परिवार को संभाल सकें। इस समय शिक्षा पर उतना जोर नही था। परिवार की जरूरतें बढ़ी तो पढ़ी लिखी बेटियां और महिलाएं घर की चाहरदीवारी से निकलीं। नौकरी करने लगीं। बिजनेस में परिवार को सहयोग देने लगीं।समय बदला ।महिलाएं आज शिक्षित हो सभी क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दे रही हैं। नौकरी के लिए अकेली युवती का विदेश जाना अब आम हो गया। समय के साथ− साथ समाज की प्राथमिकताएं भी बदलीं। नहीं बदला तो महिलाओं और युवतियों के शोषण का सिलसिला। भारतीय समाज में फैली दहेज की कुप्रथा के कारण गर्भ में ही बालिका भ्रूण मारे जाने लगे।परिवार में ही आसपास ने नाते रिश्तेदारों द्वारा छुटपन से बेटियों के साथ छेड़छाड़ ,यौन शोषण चलता रहा।देश में चेतना आई ,शिक्षा का स्तर बढ़ा पर महिलाओं के प्रति होने वाले अपराध कम नही हुए। राष्ट्रीय महिला आयोग ने सूचित किया कि वर्ष 2021 के प्रारंभिक आठ महीनों में महिलाओं के खिलाफ अपराधों की शिकायतों में पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 46 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। राष्ट्रीय महिला आयोग को साल 2021 में महिलाओं के खिलाफ अपराध की करीब 31,000 शिकायतें मिलीं थी जो 2014 के बाद सबसे ज्यादा हैं। इनमें से आधे से ज्यादा मामले उत्तर प्रदेश के थे। महिलाओं के खिलाफ अपराध की शिकायतों में 2020 की तुलना में 2021 में 30 प्रतिशत का इजाफा हुआ था। साल 2020 में कुल 23,722 शिकायतें महिला आयोग को मिली थीं।राष्ट्रीय महिला आयोग की ओर से जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक 30,864 शिकायतों में से, अधिकतम 11,013 सम्मान के साथ जीने के अधिकार से संबंधित थीं। घरेलू हिंसा से संबंधित 6,633 और दहेज उत्पीड़न से संबंधित 4,589 शिकायतें थीं। सबसे अधिक आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ अपराधों की सबसे अधिक 15,828 शिकायतें दर्ज की गईं, इसके बाद दिल्ली में 3,336, महाराष्ट्र में 1,504, हरियाणा में 1,460 और बिहार में 1,456 शिकायतें दर्ज की गईं।आयोग के आंकड़ों के अनुसार, महिलाओं के शील भंग या छेड़छाड़ के अपराध के संबंध में 1,819 शिकायतें मिली हैं। बलात्कार और बलात्कार की कोशिश 1,675 शिकायतें, महिलाओं के प्रति पुलिस की उदासीनता की 1,537 और साइबर अपराधों की 858 शिकायतें मिली हैं। ये वे शिकायत हैं जो रजिस्टर होती हैं1 इससे कई गुनी शिकायत तो दर्ज ही नही होती। परिवार का सम्मान बताकर ,युवती की स्मिता की बातकर घटनांए दबाली जाती हैं। अब तक बच्चियों को गाने – बचाना ,डांस करने के वीडियों सामने आते थे। हाल ही में एक वीडियों सामने आया जिसमें एक पिता अपनी बेटी को लाठी चलाना सिखा रहा है। इस छोटे से वीडियों को बहुत पसंद किया गया। एक बेटी को तलवार चलानासिखाने का वीडियो देखने को मिला। जूड़े− कराटे सीखते भी बेटियां दिखाई देने लगी हैं। किंतु अभी इससे बहुत आगे बढ़ना होगा। प्रत्येक बेटी का आत्मरक्षा सिखानी होगी। आज समय की मांग है कि परिवार विशेषकर मां बेटी को बचपन से गुड टच और बैड टच से अवगत कराए। इनका अंतर बताएं। कहीं कुछ घर के आसपास , स्कूल में, स्कूल बस में अगर गलत होता है तो बेटी घर आकर बतांए।बेटी अब घर की देहरी के अंदर तक ही सीमित नही रह गई है। वह कार्य के लिए घर से बाहर निकल रही है। ट्रेन में, बस में अकेले सफर कर रही है।नौकरी के लिए सात समुंद पार जा रही है।ऐसे में जरूरत है उसे आत्मसुरक्षा के लिए तैयार करने की।जुडे−कराटे सिखाने की। आत्मसुरक्षा में निपुण करने की, ताकि वह विपरीत परिस्थिति में अपना बचाव कर सके।अगर ऐसा होगा तो छेड़छाड़ करने वाले के भय से युवती को आत्महत्या नही करनी पड़ेगी।जबकि आज इस तरह की रोज अखबारों में खबर आ रही हैं। पिछले दिनों मुरादाबाद में से 12वीं में पढ़ने वाली छात्रा ने छेड़छाड़ से परेशान होकर कीटनाशक खा कर आत्महत्याकर ली। मुंबई के विनोबा भावे नगर चचेरे भाई के बार-बार यौन उत्पीड़न से तंग आकर 15 वर्षीय किशोरी ने आत्महत्या की। उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जनपद में मनचले की छेड़छाड़ से परेशान छात्रा ने अपने ही घर में फांसी का फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली।इस तरह की खबर रोज अखबारों में सुर्खियां बन रही हैं। हम अपने परिवार की बेटी का ऐसे संस्कार और शिक्षा दें। आत्मनिर्भर बनांए, आत्मसुरक्षा सिखाएं,ज्यादती के खिलाफ उसे आवाज उठाना भी सिखांए ताकि समाज की कन्या और हमारी बेटी की खबर अखबार की सुर्खी न बने। शपथ लें कि गर्भ में बेटियों को नही मारेंगे। बेटी व्यक्ति विशेष की होने के साथ ही समाज की होती हैं। वचन लें कि आपदा में प्रत्येक बेटी की मदद करेंगे। किसी बेटी पर होती ज्यादती और जुल्म देखकर मुंह नही फेर लेंगे। आंख नही मूदेंगे। बल्कि ज्यादती करने वाले का पूरी क्षमता और शक्ति से विरोध करेंगे। अशोक मधुप (लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)