Tuesday, July 28, 2020

पत्रकारिता की भूली बिसरी कहानी -3

पत्रकारिता की भूली बिसरी कहानी -3

बिजनौर में रामलीला मैदान में भाजपा के व‌रिष्ठ नेता अटल विहारी बाजपेयी जी की सभा थी। उस दिन अचानक रेहड़ के पत्रकार साथी अशोक कुमार शर्मा  आ गए। बोले- पुलिस के एक दरोगा को  मकान किराए पर दे दिया था। उसका तबादला हो गया किंतु वह मकान खाली नहीं कर रहा।

मैंने पूरी बात सुनी। उन्हें सभास्थल पर अपने साथ ले गया।  मुझे  उम्मीद थी कि वहां एसपी साहब मिलेंगे।पुलिस अधीक्षक उस समय दिलीप त्रिवेदी जी ही  थे।  वह कार्यक्रम स्थल पर बाहर ही मिल गए। मैंने अशोक शर्मा  जी को उनसे मिलवाया। उन्होंने समस्या सुनी। कहा कि एक सप्ताह में मकान खाली हो जाएगा। एक सप्ताह की बात सुनकर मुझे आश्चर्य  हुआ।
इसपर उन्होंने कहा कि कल बरेली में आईजी की मी‌ट‌िंग है। मुझे उसमें जाना  है। आई जी साहब से कहकर इस दरोगा का  बरेली जनपद में तबादला करा दूंगा। आर्डर आने के बाद तुरंत उसे रिलीव कर   दिया जाए्गा।ऐसे में वह स्वतः मकान खाली कर जाएगा। या करा दिया जाएगा। ऐसा ही हुआ भी।

ऐसा ही मकान का एक मामला मेरे मित्र रज्जी खन्ना उर्फ  राजकिशोर खन्ना का फंसा। स्वर्गीय रज्जी खन्ना की मुख्य डाक घर के सामने  जोली टीवी नाम से  दुकान थी। जैन मंदिर के पास डाक्टर दीपक के क्लिनिक के ऊपर का एक पोर्शन खाली था। पुलिस के एक हैड कांस्टेबिल ने  इसे किराए के लिए मांगा। रज्जी खन्ना ने उस समय के हिसाब से  किराया काफी ज्यादा,  पांच हजार रुपये के आसपास प्रतिमाह बताया। सही राशि मुझे अब याद नहीं। वह मकान में आकर रहने लगा। एक म‌हीना बीता ।दो महीने बीते। उसने रज्जी खन्ना को किराया नहीं  दिया। किराया मांगा  तो बोला कि मै  तुम्हारे मुहल्ले  की सुरक्षा कर रहा हूं। तुम खुद मुझे  इसके लिए 20 हजार रूपये महीना दो।  मामला चलता रहा। उसका अम्हेड़ा चौकी केे लिए तबादला हो गया। वह अपना सामान तो ले गया किंतु मकान से ताला नही खोल कर गया। रज्जी खन्ना से कह गया कि मेरी बंदूक रखी है। ताला मत तोड़ लेना।

यह सुन रज्जी खन्ना हक्के - बक्के रह  गए। वे थे  तुनक मिजाज। भ्रष्टाचार विरोधी एक संगठन भी चलाते थे। जरा जरा सी बात पर गुुस्सा आ जाता था।उन्होंने आव देखा न ताव ।  इस घटना का इश्तहार छपवाया। शहर में बंटवा दिया। एसपी को भी दे आए। मामला नहीं ‌निपटा। हमारे पत्रकार साथी शिवकुमार जी  उनके पास बैठते थे। शिवकुमार जी ने यह कहानी मुझे बताई। हल्दौर के थानाध्यक्ष बल्ले सिंह हमारे मित्र थे।अम्हेड़ा चौकी उनके अधीन थी।वे जब भी बिजनौर आते थे  तो मुझसे  जरूर मिलते  थे। मैने समस्या उन्हें बताई। उन्होंने कहा कि मामला निपट जाएगा। एक दो दिन बाद उन्होंने उस दीवान से लेकर मकान की चाबी मुझे भिजवा दी। तब मैंने कहा - रज्जी भाई मकान देते समय देख तो लेते कि लेने वाले की हालत किराया देने की है भी या नहीं।  मकान ऐसे ही ,बिना सोचे समझे किसी को भी किराये पर देना उचित नहीं है । फालतू के लफड़े लेते हो।

Monday, July 27, 2020

प्रदीप जैन पर हमला

पत्रकारिता की भूली बिसरी कथाएं -2
--प्रदीप जैन पर हमला
वर्ष 1995 । मैं श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के पांडिचेरी सम्मेलन में भाग लेने परिवार सहित गया था। 25 दिन के अवकाश पर निकला था । सफर में पता चला कि नगीना के हमारे साथी पत्रकार प्रदीप जैन को पुलिस ने पकड़ लिया है। पूरे शहर में पिटाई करते हुए जुलूस भी निकाला गया । तमंचे के साथ उनकी गिरफ्तारी दिखा दी गयी है।प्रदीप जैन नगीने की अपनी ठसक के लिए मशहूर थे ।सम्मान बहुत था। यद‌ि कहीं प्रशासन उन्हें ले जाता तो एसडीएम की गाड़ी में प्रदीप जैन अकेले जाते। एसडीएम सीओ की गाड़ी में होते। नगीना में प्रदीप ने अलग तरह की पत्रकारिता पैदा की।अलग हटकर पत्रकारिता की।
इंस्पेक्टर की वहां के लाटरी माफियाओं उठ-बैठ थी।ये माफिया प्रदीप जैन से नाराज थे।उन्हें सबक सिखाना चाहते थे।
मैं लखनऊ पहुॅचा तो ऑफिस के साथी शैलेंद्र का फोन आया। अतुल जी (अमर उजाला के मालिक अतुल माहेश्वरी जी) का आदेश है कि तुंरत बिजनौर आओ। कई दिन का अवकाश बकाया था। परिवार का लखनऊ घूमने का मन था। मैंने भी ढंग से कभी लखनऊ नहीं देखा था।मैंने अतुल जी से बात की। उन्होंने कहा कि हमारे रिपोर्टर के सम्मान का मामला है। नगीने का इंस्पैक्टर हटना चाहिए। मैंने पुलिस अधीक्षक ‌निरंजन लाल से फोन पर बात की। मेरी उनसे अच्छी उठ -बैठ थी। उन्होंने कहा कि इंस्पैक्टर से ज्यादा वहां का सीओ बदमाश है। पहले वह हटेगा। फिर इंस्पैक्टर। कल तक सीओ हट जाएगा। इसके बाद इंस्पैक्टर भी हट जाएगा। मैंने एसपी से हुई बात अतुल जी को बता दी। बच्चों की नाराजगी के बावजूद मैं बिजनौर लौट आया।मेरे बिजनौर आने से पहले ही सीओ हट चुका था। उससे अगले दिन इंसपेक्टर नगीना हटे।
प्रदीप जैन को प्रताड़नाएं देने के बाद उनका हत्या के प्रयास (307) का झूठा मुकदमा दर्ज कर बिजनौर जेल तो भेज दिया।अगले दिन यह खबर समाचार पत्रों में छपने के बाद बिजनौर समेत आसपास के कई जिलों(जिनमें वर्तमान के उत्तराखंड के क्षेत्र भी)के पत्रकार एकजुट होकर बिजनौर में एकत्र हुए। जिला मुख्यालय पर विशाल विरोध प्रदर्शन हुआ।
पत्रकारों की एकता व दबाव को देखकर तत्कालीन मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद जिले के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक ने अपर पुलिस अधीक्षक को नगीना भेजकर जांच कराई । पुलिस द्वारा दर्ज किए गए मुकदमे को वापस लिया।पत्रकारों की एकता के कारण ही प्रदीप जैन दो दिन बाद ही जेल से छूटकर आ गए। सीओ ओर इन्स्पेक्टर के हटने से सारे में संदेश गया कि अमर उजाला के रिपोर्टर के साथ ज्यादती की थी, इसलिए हटे। बिजनौर आकर मैं निरंजन लाल जी से मिला। उन्हें धन्यवाद दिया।

Sunday, July 26, 2020

जब बढ़ापुर के पत्रकार शराफत हुसैन का कत्ल होते बचा -

पत्रकारिता की भूली बिसरी कथाएं --
जब बढ़ापुर के पत्रकार शराफत हुसैन का कत्ल होते बचा -

बिजनौर में पुलिस अधीक्षक दिलीप त्रिवेदी का समय था।वह एक ईमानदार अधिकारी का कार्यकाल था। उनके कुछ किस्सेे आज भी याददाश्त से नहीं निकलते। जबकि अब वह सीआरपीएफ के डीजी पद से सेवानिवृत हो चुके हैं।‌त्रिवेदी जी का  आदेश था कि डांस कंपनी नहीं चलेंगी। बढ़ापुर  से उस समय 'अमर उजाला' के लिए शराफत हुसैन कार्य  कर रहे थे।  वहां डांस कंपनी चल रही थी।शराफत हुसैन द्वारा भेजी गयी रिपोर्ट  हमने फोटो के साथ छापी। दिलीप त्रिवेदी साहब ने छापा लगवाया। चलती कंपनी पकड़ ली गयी। मजबूरन  थानाध्यक्ष महोदय को उसे बंद कराना पड़ा। उनका बहुत आ‌र्थिक नुकसान हुआ।  एक ईमानदार अधिकारी की नजर में इमेज भी खराब हुई।शराफत कम्युनिष्ट पार्टी से जुड़े थे। वे पुलिस की ज्यादती समय- समय पर उठाते रहते थे।ईद से पहली रात को  मैं  आराम से सोया था। तीन बजे दरवाजा खड़कने पर आंख खुली । बढ़ापुर के दो कम्युनिष्ट साथी थे। मैँ उन्हें रात को तीन बजे देख कर चौंका ।उन्हें  बैठाया। ठंड थी। वे दोनों कंबल लपेटे थे।उन्होंने बताया कि आज  ईद की नमाज पढ़ने जाते समय शराफत का कत्ल हो जाएगा। थानाध्यक्ष ने जिन तीन बदमाशों को इसके लिए तैयार किया है।  इनमें से एक की माँ ने यह बात शराफत की मां को बता दी है।मैँ नींद में था। मेरी समझ में नही आ  रहा था कि क्या हो रहा है?मेरी पत्नी निर्मल चाय  बना लायीं। चाय पीते समय मेरी समझ में आया कि  मामला कुछ गंभीर  है। उनके जाने पर निर्मल बोलीं---बढ़ापुर से ये एक बजे चले होंगे। ।तब तीन बजे आए। इतनी ठंड में ।मामला बहुत गंभीर है। 
उस समय लैंड लाइन फोन थे।पांच बजे  के आसपास मैने दिलीप त्रिवेदी साहब को फोन किया।  वे बोले --सब ठीक तो है? इतनी जल्दी? मैंने उनको पूरी बात बतायी। उन्होंने कहा - चिंता मत करो। पता लगा कि उन्होंने सीओ नगीना को वायरलैस पर फौरन बताया कि आज ईद की नमाज पढ़ने  जाते समय बढ़ापुर के पत्रकार शराफत  हुसैन का कत्ल होना है। बढ़ापुर के एस. ओ.  ने बदमाशों के साथ ये प्लॉन किया है। आप तुरंत  बढ़ापुर जाएं और शराफत की सुरक्षा करें।अगर  उसे कुछ होता है  तो वहां के थानाध्यक्ष को गिरफ्तार कर जेल भेज दें।
बढ़ापुर एसओ ईदगाह जाने के लिए तैयार हो रहे थे। हैड मोहर्रिर ने ये मैसेज सुना। भागकर एसओ को बताया। एसओ नहाना - धोना  सब भूल गए। जल्दी तैयार होकर अपने दफ्तर पहुंचे। इतनी देर में सीओ नगीना पहुॅच गए।सीओ नगीना के रूख को देखकर थानाध्यक्ष महोदय घबरा गए। पहले वह शराफत को मरवाना चाहते थे। अब उसकी सुरक्षा में  लग गए। ईद ठीक बीत गई। शराफत साहब का  बाल भी बांका नहीं  हुआ। दिलीप त्रिवेदी साहब के पास मेरा शाम को जाकर बैठना होता था। शाम को गया तो उन्होंने   सारी कहानी बतायी।
इसके बाद शराफत साहब उस स्थान से बाहर चले गए। उन्होंने चीनी मिल नजीबाबाद में लंबे समय तक कार्य किया । अब वे सेवानिवृत हो भारतीय कम्युनिष्ट पार्टी की राजनीति कर रहे हैं। आज संचार तंत्र बहुत विकसित हो गया है पर  फिर भी यदि आज का युग होता तो आप फोन करते रहते, कोई  अधिकारी अटैंड भी नहीं करता। बदमाश अपना काम कर चुके होते ।

अशोक  मधुप

Monday, June 1, 2020

1jun 2020 Amar Ujala Bijnor
आज के शहर में कभी बहती थी गंगा की धारा, अब भी मिलते हैं प्राचीन मंदिर
गंगा के तट वाले इलाके में आज भी हैं ढ़लान वाले तट
फोटो
अशोक मधुप
बिजनौर। आज गंगा दशहरा है। बिजनौर और आसपास के लोग गंगा स्नान के लिए गंगा बैराज जाते हैं। यहीं शव का अंतिम संस्कार करते हैं। आज से 25-30 साल पहले गंगा औेर विदुर कुटी गंगा स्नान के लिए जाते ‌थे। आज से लगभग 200 साल पहले बिजनौर शहर में गंगा बहती थी और बिजनौर वासी यहीं स्नान करते थे। अब गंगा की धारा दस किलोमीटर से ज्यादा पीछे जा चुकी है।
बिजनौर के पुराने शहर में काजीपाड़ा, जाटान आदि बहुत गहराई पर बसे मोहल्ले हैं।जब‌कि शास्त्री चौक से घंटाघर पुरानी तहसील होने सदुपुरा जाने वाले रास्ते रास्त से पूरब की साइड में बसे मुहल्लों का तल सामान्य है। अचारजान में बाल कृष्ण खन्ना की कोठी से दो साइड को रास्ता गया है। इन रास्तों का ढाल 40 से 45 फिट तक है। पुराने लोग बताते रहे हैं कि कभी यहां गंगा बहती थी। ये ढाल गंगा के खोले(ढाल वाला तट) है। बताते हैं कि कभी गंगा की धार भरत विहार, नुमाईश ग्राउंड, काजीपाड़ा होते हुए बहती थी। ये ढाल गंगा के पुराने मार्ग को दर्शाता है। भगत सिंंह चौक से काजीपाड़ा, बालकृष्ण खन्ना की कोठी के दोनों साइड के ढाल, सरस्वती विद्या मंदिर से आगे का ढाल, रम्मू के चौराहे के पास से दाई ओर नीचे जाने वाला ढाल बताता है कि कभी गंगा यहां तक वही है। ये गंगा के खोले हैं। बिजनौर में गंगा सन् 1800 के पास पास तक बहती थी। इसके बाद उसकी घार दूर होती चली गई। आज यह बिजनौर से 12 किलो मीटर दूर बहती है। इस एरिया के ऊपर कई पुराने छोटे छोटे मंदिर हैं। वैसे ही मंदिर जैसे गंगा के किनारे होते हैं। रूड़की में 1825 के आसपास गंग नहर बनी। इसी दौरान बालावाली में रेलवे पुल बना। इससे गंगा की धार बंध गई। गंज के केवलानंद आश्रम के स्वर्गीय स्वामी सुखानंद जी अपने शिष्यों को बताते थे कि उन्होंने गंगा में चलते बड़े बड़े जहाज देख्रे हैं।
काजीपाड़ा के रहने वाले खाल‌िद असरार बतातें हैं कि उनके पूर्वजों ने मकान की जमीन 1872 में खरीदी। उससे पहले गंगा काजीपाड़ा से पीछे जा चुकी थी। वे कहते हैं कि काजीपाड़ा की जामा मस्जिद भी ढाल से ऊपर इसलिए बनी है क्योंकि नीचे गंगा का पानी आ जाता था।
अचारजान के निवासी संजय खन्ना एडवोकेट बताते हैं कि उनके दादा जी बताते थे कि उनकी कोठी के पीछे गंगा के खोलें हैं। वे वहते हैं कि उनकी (बाल कृष्ण खन्ना की ) कोठी के सामने की धर्मशाला बहुत ऊंची उठाकर इसलिए बनाई गई थी कि यहांतक गंगा का पानी आ जाता था।
जाटान के रहने वाले न्यूज पेेपर एजेंट दिनेश शर्मा कहते हैं कि उनके घर से मुख्य शहर में जाने के लिए सभी साउड से 40 -45 फिट की ऊचांई चढ़नी पड़ती है। वे कहते हैं कि छुटपन में घर के सामने जब वे खेलते थे तो मिट्ठी के नीचे गंगा का रेत निकलता था।
बिजनौर के इतिहास के बड़े जानकार शकील बिजनौरी कहते हैं कि कि आज से लगभग 200 साल पूर्व गंगा बिजनौर के पुराने शहर से होकर बही है। पुुरानी तहसील चौराहे से प‌श्चिम का ढाल बताता है कि ये गंगा के खोले हैं। इस ढाल के ऊपर के पुराने छोटे छोटे मंदिर गंगा किनारे बने मंदिर हैं।पुरानी तहसील से आगे एक रास्ता सदुपुरा को गया है। एक जाटान को । जाटान के ढाल से गंगा आगे बढ़ गई। इससे सदुपुरा और जलालपुर घाट वाले मार्ग को प्रभावित नही किया।
जाटान के रहने वाले बिजली विभाग से सेवानिवृत बिजेन्द्र पाल ‌सिंह बताते हैं कि मुहल्ले के वृद्ध कढेरा सिंह बताते थे कि वे इस ढाली के कुछ आगे गंगा में खूब नहाए हैं। पहले यहां गंगा बहती थी।
मोहल्ला जाटान निवासी 85 वीरेंद्र अग्रवाल सर्राफ बताते हैं कि वे चार पीढ़ियों से जाटान में रह रहे हैं। उनके पिता बताते थे कि जहां उनका घर है वहां कभी गंगा बहती थी। उनका घर गंगा के तट जैसे टीले पर दस फीट की ऊंचाई पर है। उनके मकान से भी ऊपर तक ये टीले थे। उनके अनुसार जब वे छोटे थे तो गांव गोकलपुर वाली जगह में गंगा बहती थी। वह वहां खूब नहाते थे। जहां चामुंडा मंदिर है वहीं से गंगा की रेती शुरू हो जाती थी। शीतला माता मंदिर के पास गंगा का तट था। शीतला माता मंदिर में खड़ा पिलखन गंगा तट पर था। वहां रखी शिवलिंग व नंदी की मूर्ति भी गंगा तट से ही मिली थीं। अब तो गंगा की धारा वहां से कई किलोमीटर दूर खिसक चुकी है।
जाटान निवासी डा.दीपक विश्नोई बताते हैं कि जहां उनका घर है उसके सामने कभी श्मशान घाट था। यहां गंगा के किनारे शवों का अंतिम संस्कार होता था। शहर तो बहुत थोड़ा सा घंटाघर की ओर ही था। धीरे धीरे गंगा की धारा पीछे की ओर गई तो यहां शहर बस गया।
अशोक मधुप

Monday, May 25, 2020

गोपाल शर्मा और श्रीलंका

 
 
गोपाल शर्मा और श्रीलंका
2014 में आईएफडब्लूजे का एक प्रतिनिधिमंडल श्रीलंका गया। उसमें मैं भी था। श्री लंका दूरदर्शन की और से हमारे सम्मान में भोज का आयोजन था।वहां के पदाधिकारियों से भारतीय पत्रकारों का परिचय हुआ। मैने अपना परिचय देते हुए कहा कि मैं रेडियो सिलोन के पूर्व उद्घोषक गोपाल शर्मा की भूमि बिजनौर जनपद से हूं।
स्वागत कार्यक्रम के बाद दूरदर्शन भवन घूमकर हम भोजन कर रहे थे। एक छरहरे बदन की सांवली महिला ने आकर पूछा कि गोपाल शर्मा के यहां से कौन हैं? मैँ चौंका । मैने बताया कि मैँ हूं। उसने अपना नाम सुभाषिनी डी सेलवा बताया। कहा कि वह रेडियो सिलोन में लाइब्रेरियन है।गोपाल शर्मा पर रिसर्च कर रही है। उसने अपने पर्स से गोपाल शर्मा कर बायोग्राफी आवाज की दुनिया के दोस्तों निकालकर दिखाई।
वह हिंदी बहुत बढ़िया और शुद्ध बोल रहीं थी। मैने पूछा – इतनी बढ़िया हिंदी कहां से सीखी। बोली – लखनऊ में रहकर पढ़ी है। इसके बाद बहुत बातचीत हुई। टूर में वह हमारे साथ रहीं। हमें कई जगह गाइड भी किया। सुभा‌षिनी ने एक दिन रेडियो सिलोन के लिए मेरा इंटरव्यू लेने की इच्छा जताई। कहा – अंग्रेजी में बोल पाओगे । मैने कहा क्यों नहीं।
उसने मेरा इंटरव्यू रिकार्ड करते पूछा -रेडियो स‌िलोन के बारे में क्या कहेंगे।मैने कहा कि किशोरावस्था से जवानी तक हमारे समय मनोरंजन के लिए रेडियो सिलोन सुना जाता था।खबरों के लिए बीबीसी लंदन। मेरी पीढ़ी तो रेडियो सिलोन सुनती हुई ही जवान हुई है।
अशोक मधुप

रेडियो सिलोन के पूर्व अनांउसर गोपाल शर्मा नहीं रहे

रेडियो सिलोन के पूर्व अनांउसर गोपाल शर्मा नहीं रहे
रेडियो सीलोन के दिग्गज कमेंटेटर और होस्ट गोपाल शर्मा का   23 मई 2021 को 88 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्हें भारत का पहला रेडियो जॉकी कहा जाता है। मुंबई के बोरीवली स्थित अपने निवास स्थान पर  गोपाल शर्मा ने शुक्रवार को अंतिम सांस ली।
गोपाल शर्मा
गोपाल शर्मा का जन्म उत्तर प्रदेश में बिजनौर के चांदपुर में हुआ था। साल 1956 में वो रेडियो सीलोन से जुड़े जो कि एशिया का सबसे पुराना रेडियो स्टेशन है। 1950-60 के दशक में रेडियो सीलोन बहुत मशहूर हुआ करता था। गोपाल शर्मा ने रेडियो सीलोन में 11 साल से ज्यादा समय तक काम किया। इसके बाद वो फिल्म संगीत से जुड़े दूसरे कार्यक्रम और शोज करते रहे। साल 1958-59 में उन्होंने एक शो ‘कल और आज’ होस्ट किया।
साल 1967 में गोपाल शर्मा मुंबई पहुंचे। बाद में विविध भारती से जुड़कर उन्होंने रेडियो पर कई कार्यक्रम प्रस्तुत किए। रेडियो के अलावा वो स्टेज शोज करते थे। साथ ही कई डॉक्यूमेंट्रीज में भी उन्होंने अपनी आवाज दी।
गोपाल शर्मा अपने कार्यक्रम की शुरुआत ‘आवाज की दुनिया के दोस्तों…’ बोलकर करते थे। ये लाइन एक तरह से उनकी पहचान बन गई थी। साल 2007 में उनकी ऑटोबायोग्राफी भी इसी नाम से प्रकाशित हुई थी।
मेेरठ हुईथी गोपाल शर्मा की शादी
अशोक मधुप
बिजनौर,रेडियो सिलोन के लगातार 11 साल तक अनांउसर रहे गोपाल शर्मा की शादी मेरठ के पंड‌ित शिव शंकर शर्मा की पुत्री शशि शर्मा से 13 अप्रेल 1964 को हुई।मेरठ का यह परिवार आर्य समाजी था। शश‌ि शर्मा के दादा पंड‌ित तुलसी राम वेदों के बड़े विद्यान थे।इन्होंने संस्कृत से वेदों का हिंदी में अनुवाद किया था। इस शादी की विशेषता यह थी कि इसमें मुंबई से गायक महेंद्र कपूर आए थे। उन्होंने कई घंटे बारातियों और घरातियों का मनोरंजन किया था।
गोपाल शर्मा ने अपनी पुस्तक आवाज की दुनिया के दोस्तों में इस शादी के बारे में भी विस्तार से बताया है। वह कहतें हैं कि शश‌ि के दादाजी की तुलसी प्रेस थी। उस समय उनकी शादी का सब और चर्चा था। अखबारों में खबर छप रही थी। 13 को दो बसों से मेरठ बारात गई थी। इस शादी में गायक महेंद्र कपूर,एक करोड़पति श्रोता सुरेश चंद्र अग्रवाल, आशा भौंसले के सेकेट्री प्राण ऐरी, गुजराती अनाउंसर सहाग दीवान हिंदी विभाग के वरिष्ठ उदघोषक शील वर्मा पांच व्यक्ति मुंबई से आए थे।
वे कहते है कि उनके ससुराल वालों को ये पता नहीं था कि उनका दामाद रेडियों सिलोन का प्रसिद्ध उदघोषक गोपाल शर्मा है।14 अप्रेल को सुबह दो बजे से सवेरे छह बजे चार घंटे लगातार बरातियों और घरातियों का मनोरजन किया। महेंद्र कपूर के कार्यक्रम की मेरठ में खूब धूम रही। 14 की शाम को बारात विदा होकर चांदपुर आ गई।रेडियों सिलोन ने उनकी शादी की खुशी में सभी भांषाओं के प्रोग्राम में विशेष कार्यक्रम प्रसतुत किए।
वे कहते हैं कि उनकी शादी की दावत मुंबई के होटल नटराज में हुई थी। व्यवस्था गायक महेंद्र कपूर ने की थी।।
प्रसिद्ध गायिका आशा भोंसले ने उन्हें अपना भाई बनाया था। उनके बेटी के जन्म पर वे चांदपुर आई थीं। और बेटी को नामकरण कियाथा। बेटी को नाम दिया था चेतना।बाद में परिवार वालों की सलाह पर नाम बदल कर हुआ महिमा।
अशोक मधुप
गोपाल शर्मा ने अपनी आवाज से दुनिया में बनाई पहचान
अशोक मधुप
बिजनौर,दिसबर सन १९३१ में बिजनौर जनपद के चांदपुर नगर में जन्में गोपाल शर्मा ने आवाज की दुनिया में वो नाम रोशन किया कि उनके समय का हर गायक और फिल्मी कलाकार उनका दीवाना रहा। हर गायक और कलाकार की तमन्ना होती कि गोपाल शर्मा उनपर नजरे करम कर दें और उनकी गाड़ी चल निकले। जानी मानी गायिका आशा भोंसले ने तो उन्हें भाई बनाया था। गोपाल शर्मा के बेटी के जन्म पर वह चांदपुर आईं भी थीं।
टीवी से पहले रेडियो युग था। रेडियो के कार्यक्रम सुनने के लिए उस समय लाइन लगती थी। आकाशवाणी दिल्ली से शाम के समय आने वाले किसान भाइयों के कार्यक्रम को सुनने के लिए चौपाल या रेडियो स्वामी के घर पर भीड़ एकत्र हो जाती थी। सन १९६० के आसपास रेडियो सिलोन भारत ही नहीं पूरी एशिया में मनोरंजन का सबसे लोकप्रिय कार्यक्रम प्रस्तुत करता था। विविध भारती शास्त्रीय संगीत पर आधारित कार्यक्रम पेश करता था। उस पर बजने वाले फिल्मी गाने भी प्राय: शास़त्रीय संगीत पर आधारित होते थे। जबकि रेडियो सिलोन शुद्ध मनोरंजन के लिए कार्यक्रम प्रस्तुत करता था और उस पर भारतीय फिल्मों के सभी गाने बजते थे। मनोरंजन के लिए फिल्मों के गाने बजने के कारण रेडियो सिलोन पूरे एशिया में भारतीयों का सबसे पंसदीदा था। गोपाल शर्मा सन १९५६ से २४ अप्रैल ६७ तक ११ साल लगातार इस स्टेशन के हिंदी कार्यकर्मो के अनाउंसर रहे।
एक साल की उम्र में गोपाल शर्मा की माता का निधन हो गया। बिना माता की छत्र छाया में पले बढ़े गोपाल शर्मा ने आर्थिक समस्याओं से जूझते हुए मेरठ कॉलेज मेरठ से बीए की परीक्षा उतीर्ण की । बीए करने के बाद फिल्म इंडस्ट्री में भाग्य आजमाने मुंबई पंहुच गए। यहां कुछ बनने के लंबे और अथक संघर्ष में उनकी उस समय के प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता बलराज साहनी से मुलाकात हो गई। कुछ समय उनके ग्रुप में काम किया और बलराज साहनी की सलाह पर रेडियों की दुनिया मेंं प्रवेश कर गए। रेडियो के कैजुअल आट्रिस्ट के रूप में काम करते समय रेडियों सिलौन के लिए चयन हो गया। रेडियो सिलोन में काम करने के दौरान मेरठ में उनका विवाह हुआ। रेडियो सिलोन के लिए ११ साल लगातार काम कर गोपाल शर्मा ने एक रिकार्ड बनाया। भारत लौटकर गोपाल शर्मा ने आकाशवाणी के केजुअल आर्टिस्ट के रूप में काम करने के साथ ही विभिन्न कंपनियों के लिए विज्ञापन बनाने और बड़े कार्यक्रम के संचालन का लंबे समय तक कार्य किया।
रेडियो सिलोन से लोटकर गोपाल शर्मा मुंबई में बस गए थे।
एक भेंट में अपनी कामयाबी का राज समय का पालन करता बताया था। वे कहते हैं कि मैं प्रत्येक कार्यक्रम में निर्धारित समय से पहले पंहुचता रहा हॅूं। रेडियो सिलोन के ११ साल के कार्यकाल में एक दिन भी देर से नहीं पहुंचा।
बीबीसी लंदन का निमंत्रण नहीं किया स्वीकार
अपनी आत्म कथा आवाज की दुनिया के दोस्तों में वह कहतें हैं कि विविध भारती में चयन के लिए बुलाए जाने पर उन्होंने कार्य करने से इसलिए इंकार कर दिया कि उस पर सरकारी तंत्र हावी है। कुछ नया करने वालों की कोई कदर नहीं है। अपनी आत्मकथा में गोपाल शर्मा लिखतें हैं कि रेडियो सिलोन पर कार्य करने के दौरान मैं भारत आया था। एक कार्यक्रम में बीबीसी लंदन के रत्नाकर भारतीय जी से मुलाकात हो गई। उन्होंने तुरंत कहा – शर्मा जी आप कहां रेडियो सिलोन में पड़े हैं। आपका स्थान बीबीसी लंदन है। आप जब चाहें तब आपको बुलवा सकता हूं। मैने कहा -भारतीय जी बीबीसी लंदन नंबर एक है। लेकिन मेरा मानना यह है कि आपके प्रोग्राम सुनने वाले भारत में गिने चुने हैं। जबकि मेरा प्रोग्राम सुनने वाले एशिया भर में करोड़ों हैं। मै करोड़ो श्रोताओं का दिल नहीं दुखा सकता। रूपया कमाना मेरा लक्ष्य नहींं है।्र
फिल्म में भी किया काम
गोपाल शर्मा अपनी आत्म कथा में लिखतें हैं कि उन्होंने तीन अन्य साथियों के साथ फिल्म अधिकार के भजन माटी कहे कुम्हार में बाल साधु की भूमिका की। मैं सोचता था कि गाने के दो तीन मिनट में स्क्रीन पर मेरा चेहरा एक दो बार दिखाया गया होगा। फिल्म रिलीज हो गई किंतु जेब में इतने पैसे नहीं थे कि फिल्म देख पाते। रेडियो सिलोन पर जाने से पूर्व चांदपुर गया तो हमारे बहुत सीनियर और हाकी के बड़े खिलाड़ी कैलाश मित्तल मेरे से विशेष रूप से मिलने आए। उनका चांदपुर में सिनेमा हाल है। कहने लगे शर्मा जी आपकी फिल्म अधिकार की एंक्टिग से मुझे बहुत आमदनी हुई। मैंने जगह – जगह आपके नाम का प्रचार कराया कि चांदपुर का तरूण कलाकार गुरू रघुनाथ प्रसाद का लड़का गोपाल शर्मा फिल्म में काम कर रहा है। इसका इतना असर हुआ कि अकेले चांदपुर में फिल्म अधिकार एक साल तक चली। बिजनौर जनपद में कई साल तक यह फिल्म चलाई और इतनी आमदनी हुई कि हमारा एक और सिनेमा हाल बन गया। मुहम्मद रफी से मुलाकात गोपाल शर्मा लिखतें हैं कि मै एक बार भारत आने पर ओपी नैय्यर साहब से मिलने गया। मुझे देखते ही नैय्यर साहब ने कहा कि विदेश जाने की सूचना तो रेडियो से दो ही व्यक्तियों के बारे में दी जाती है, एक तो भारत के प्रधानमंत्री और दूसरे रेडियों सिलोन के गोपाल शर्मा की। बाते शुरू ही की थीं कि कुछ ही देर में फोन आ गया। नैय्यर साहब ने कहा आप जिनके बारे में पूछ रहें हैं, वे मेरे पास बैठे हैं। उन्होंने मुझे फोन दे दिया। फोन करने वाले मुहम्मद रफी थे। वे मुझसे मिलना चाहते थे। मैनेंं नैय्यर साहब से आज्ञा ली और रफी साहब से मिलने चला गया।मिलते ही उन्होंने तुरंत मुझे सीने से लगा लिया। बोले जब मैं नया नया मुंबई आया था तो मेरे भाई हमीद साहब ने मेरे लिए खूब भागदौड़ की। मेरा अरमान था कि मुझे जनाब कुंदन लाल सहगल साहब केसाथ गाने का मौका मिले। मौका मिला भी जूही जूही जूही, मेरे सपनों की रानी वाले गीत में। इस गीत के अंत में सोलो लाइन दो बार मैने गाई। संगीत प्रेमियों को यह बात रेडियो सिलोन पर सबसे पहले गोपाल शर्मा जी आप ने ही बताई। महान गायक रफी साहब ही नहीं बल्कि उस समय का हर गायक गोपाल शर्मा से मिलने केलिए उत्सुक रहता था।
अशोक मधुप

Saturday, March 14, 2020