Wednesday, June 5, 2024

क्या नई मोदी सरकार का पहला टारगेट पीओके पर कब्जा होगा?


अशोक मधुप

वरिष्ठ  पत्रकार

देश का मिजाज और एग्जिट पोल की तस्वीर बता रही है कि लोकसभा चुनाव-2024 के लिए भी 'नरेंद्र मोदी' को फिर प्रचंड जनादेश मिल रहा है। तीसरी बार भी देश के  प्रधानमंत्री के पद को नरेंद्र मोदी सुशोभित करेंगे।   इस   चुनाव में कश्मीर से कन्याकुमारी तक 'नरेंद्र मोदी' के खिलाफ  इंडी अलायंस का  गला फाडकर  चिल्लाना कोई करिश्मा नही कर सका। इंडी अलायंस औंधे मुंह धड़ाम हो गया है। पूरे चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विपक्षी इंडी गठबंधन का निशाना रहे । इंडी अलायंस ने गला फाड़− फाड़ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाए।देश की सुरक्षा को प्रभावित करने वाले मुद्दे भी  उठाए।किंतु जनता का रूझान कहता है कि उसने इन सब को नकार दिया। प्रधानमंत्री का अबकि बार चार सौ  सीट का दावा भले ही पूरा न हो किंतु ये निश्चित है कि केंद्र में भाजपा  पूर्ण  बहुमत से  सरकार बना  रही है।

इस बार सरकार के  सामने भले की आंतरिक मुद्दा भ्रष्टाचार से निपटना  हो किंतु इस  बार  भारत और प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी की विदेश  नीति की भी  परीक्षा होगी। अलग तरह की चुनौती उसके सामने होगी।इस चुनाव में भाजपा के नेताओं ने देश भक्ति को धार देने का प्रयास किया।प्रचार के दौरान  पाकिस्तान अधिकृत  कशमीर को मुक्त कराने का मुद्दा  बार− बार उभारा गया।

 चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सिपहसालार कहते घूमते  रहे हैं कि सरकार  बनी तो  पाक अधिकृत कश्मीर पर भारत का   कब्जा होगा। शहरी निकाय मंत्री कमल गुप्ता हरियाणा के रोहतक में व्यापारियों द्वारा आयोजित अभिनंदन समारोह में कहा कि  कि आने वाले दो-तीन साल में किसी भी क्षण पाक अधिकृत कश्मीर भारत में शामिल हो सकता है। विदेश मंत्री जयशंकर ने भी एक बयान में पीओके को लेकर भारत के दावे को दोहराया था। चार  अप्रैल को मीडिया से बात करते हुए जयशंकर ने कहा था, हम कभी भी ये स्वीकार नहीं करेंगे कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर भारत का अभिन्न अंग नहीं है। सेरामपुर पश्चिम बंगाल में एक रैली को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि 2019 में अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के बाद अशांत कश्मीर में शांति लौट आई है, लेकिन पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर "अब आजादी के नारों और विरोध प्रदर्शनों से गूंज रहा है।"उन्होंने कहा, "सरकार द्वारा 2019 में अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के बाद कश्मीर में शांति लौट आई है। लेकिन अब हम पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में विरोध प्रदर्शन देख रहे हैं। पहले यहां आजादी के नारे लगते थे, अब वही नारे पीओके में लगते हैं। पहले यहां पत्थर फेंके जाते थे, अब पीओके में पत्थर फेंके जाते हैं।"उन्होनें कहा कि पाक अधिकृत कश्मीर भारत का है और हम उसे लेकर रहेंगे ।

योगी आदित्यनाथ तो सबसे आगे बढ़ गए। उन्होंने  पाकिस्तान को निशाने पर लेते हुए कहा कि आज उसके लिए पीओके को भी बचाना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने कहा कि चुनाव के बाद मोदी जी को तीसरे कार्यकाल पर बोलते हुए योगी आदित्यनाथ ने पाकिस्तान को निशाने पर लेते हुए कहा कि आज पाकिस्तान के लिए पीओके को भी बचाना मुश्किल हो रहा है. उन्होंने कहा कि मोदी जी को तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने दीजिए, अगले छह महीने के अंदर 'पाक अधिकृत कश्मीर' भारत का हिस्सा होगा।अब तक भारत विदेशों में बैठे भारत के आंतकियों की मौत पर चुप्पी साधे था।अपने पर आरोप लगने पर भारत का कहना था कि इनमें उसका हाथ  नही है, किंतु योगी आदित्यनाथ ने कहा, "ब्रिटेन के एक बड़े समाचार पत्र ने लिखा कि पाकिस्तान के अंदर पिछले तीन वर्ष के अंदर जितने बड़े दुर्दांत आतंकवादी थे, वे एक-एक करके मारे गए। मारने वालों में भारत की एजेंसी का हाथ है।" मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, "भई अब जो हमारे दुश्मन है, हम उसकी पूजा थोड़ी करेंगे। कोई हमारे लोगों को मारेगा  तो हम उसको पूजेंगे नहीं भई, हम भी वो ही करेंगे जिसका वो हकदार है।

 असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि हमें 400 सीट इसलिए चाहिए ताकि पीओके ले सकें। हिमंता बिस्वा सरमा ने दिल्ली में प्रचार करते हुए कहा कि कांग्रेस पूछती है कि 400 सीट क्यों चाहिए। उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस का शासन था तब हमें बताया गया था कि एक तरह से कश्मीर भारत में भी है पाकिस्तान में भी है। हमारी संसद में कभी इसकी चर्चा नहीं होती थी कि जो कश्मीर पाकिस्तान के साथ है वह पाक अधिकृत कश्मीर है। वहां लोग भारत का तिरंगा हाथ में लेकर आंदोलन कर रहे है पाकिस्तान के खिलाफ। उन्होंने कहा कि यह शुरुआत है। मोदी जी को 400 सीट मिलेगी तो पाक अधिकृत कश्मीर भी भारत का ही हो जाएगा और इसका आगाज हो चुका है।इससे पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी कह चुके हैं कि जिस तरह से कश्मीर में शांति लौटी है और आर्थिक प्रगति हो रही है, पीओके के लोग खुद ये मांग करेंगे कि उन्हें भारत में विलय कर लिया जाए। विदेश मंत्री एस.जयशंकर ने भी कहा कि पीओके भारत का अंग था है और हमेशा रहेगा।

भाजपा के सिपहसालार की पाक अधिकृत कश्मीर पर चुनाव प्रचार के दौरान कब्जे की बात करते रहे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पर चुप्पी साधे रखी।किंतु कांग्रेस के  मणिशंकर अय्यर, और जम्मू −कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री  फारुख अब्दुल्ला के ये कहा कि  भाजपायी पाक अधिकृत कश्मीर पर कब्जे की बात कर रहे हैं।  पाकिस्तान ने चूड़ी  नही पहन रखी। पाकिस्तान के पास एटम बम है। अब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मसले पर चुप्पी साधे थे।किंतु पाकिस्तान ने चूडी नही पहन रखीं, पर उन्होंने जरूर कहा कि कांग्रेसी और कुछ विपक्षी नेता कह रहे हैं कि पाकिस्तान ने चूड़ी   नही पहन रखीं तो  उसे  पहना दी जाएंगी।  प्रधानमंत्री के इस कथन से साफ होता है  कि  उनके सिपहसालारों के पाक अधिकृत कश्मीर  पर कब्जे की घोषणा उनकी अपनी नही है। यह कहीं केंद्रीय  नेतृत्व में पक  रहा है और सरकार   बनने पर  वह इस पर कार्रवाई  कर सकता है।

भारत के दावे को पाकिस्तान के कार्ट की हाल की इस कार्रवाई से और बल मिला है।इसमें पाकिस्तान ने स्वीकार कर लिया है कि पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (पीओके) एक विदेशी क्षेत्र है। मशहूर कश्मीरी कवि अहमद फरहाद शाह के अपहरण मामले में इस्लामाबाद हाईकोर्ट में पाकिस्तानी सरकार ने इस तथ्य को स्वीकार कर लिया है। मशहूर कश्मीरी कवि और पत्रकार अहमद फरहाद शाह के अपहरण मामले में पाकिस्तान के अतिरिक्त अटॉर्नी जनरल की ओर से शुक्रवार को यह कबूलनामा सामने आया ।इस्लामाबाद की अदालत में अहमद फरहाद शाह के मामले की सुनवाई हो रही है। शाह का 15 मई को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ने रावलपिंडी स्थित उनके घर से अपहरण कर लिया था। उनकी पत्नी ने इस संबंध में याचिका दायर की थी।इस्लामाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस मोहसिन अख्तर कयानी ने कवि की पत्नी की याचिका पर फरहाद शाह को अदालत में पेश करने का आदेश दिया।पाकिस्तान टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, इस पर पाकिस्तान के अतिरिक्त अटॉर्नी जनरल ने जस्टिस कयानी की अदालत में दलील दी कि कवि फरहाद शाह पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में पुलिस हिरासत में हैं और उन्हें इस्लामाबाद हाईकोर्ट के सामने पेश नहीं किया जा सका।एआईआर की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस कयानी ने जवाब दिया कि यदि पीओके एक विदेशी क्षेत्र है, तो पाकिस्तानी सेना और पाकिस्तानी रेंजर्स उस जमीन में कैसे घुस गए?सुनवाई के दौरान जस्टिस कयानी ने लोगों के जबरन अपहरण की प्रथा जारी रखने के लिए पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों की आलोचना की।कवि और पत्रकार अहमद फरहाद शाह पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और वहां के लोगों के अधिकारों के लिए लड़ने वाले एक मानवाधिकार कार्यकर्ता भी हैं। उन्हें उस पाकिस्तान आर्मी  की कड़ी आलोचना के लिए जाना जाता है। उन्होंने कई बार पीओके में कई सरकार विरोधी प्रदर्शनों का नेतृत्व किया और उनमें भाग लिया।

चार जून को परिणाम आ जांएगे ।जैसी की एकजिट पोल के दावें हैं कि केंद्र में पूर्ण बहुमत से भाजपा  की सरकार बन जाएगी।इसके बाद देखना है कि चुनाव के दौरान पाक  अधिकृत कश्मीर पर भारत के कब्जे की घोषणा के लिए नई  सरकार क्या करती है या  केवल गाल  बजाकर भाजपा के सिपहसालारों  ने पाकिस्तान को फालतू में चौकन्ना  कर दिया।वह  पाक  अधिकृत कश्मीर में अब चीन की मदद से ऐसे  बंकर बना रहा है, जहां बम या मिजाइल  का असर नही  हो सकता।    

अशोक मधुप

(लेखक वरिष्ठ  पत्रकार है)

Tuesday, May 21, 2024

चिकित्सा विज्ञान को बहुत कुछ करना होगा

 चिकित्सा विज्ञान को बहुत कुछ करना  होगा

अशोक मधुप

वरिष्ठ  पत्रकार

आजादी के बाद भारत में  चिकित्सा विज्ञान  विज्ञान ने बहुत तरक्की की।इंसान का जीवन काफी सरल कर दिया।गंभीर बीमारी का इलाज खोज  लिया।  दर्द  रहित आपरेशन  होने लगे। दिल −दिमाग समेत सभी क्षेत्र में  तरक्की होने से आदमी बहुत आराम और सुख   महसूस  कर रहा है, किंतु  इतना सब होने के बाद भी अभी  बहुत कुछ किया जाना शेष है।मरीज की छोटी −छोटी परेशानी के इलाज के भी  उपाए करने होंगे।

चिकित्सा विज्ञान इंसान के जीवन को सरल करने की हर बेहतर कोशिश में लगा है,इस सबके बावजूद अभी  बहुत कुछ होना है।हाल में गुजरात में राजकोट के स्टर्लिंग हास्पिटल में मेरे  हृदय की बाई−पास सर्जरी हुई।छोटे बेटे के पास यहां आए थे।यहीं तबियत खराब होने का पता चला।इसलिए मुझे यहीं आपरेशन कराना पड़ा। मुझे सवेरे सात बजे आपरेशन थियेटर में ले लिया गया।आपरेशन थियेटर की टेबिल पर मुझे  लिटाकर स्टाफ  मेरे  हाथ  टेबिल में  बांधता  है।यहां तक मुझे याद है। अब तक सिर्फ दो आपरेशन थियेटर सहायक ही मेरे आसपास थे।  इसके बाद कब चिकित्सक आ गए। कब आपरेशन हो गया। मुझे कुछ पता नही।  दुपहर बाद दो  बजे के आसपास मुझे  लगा कि रोशनी जली है। मुंह में भी  कोई पाइप का  चुभा।मैनें आख  खोलीं।एक बड़े हाल में कुछ बैड पर  मेरे जैसे मरीज लेटे थे। सामने लगी घड़ी दो  बजा रही थी। मेरे मुंह में दिया हुआ  पाइप हलका चुभ  रहा था।  बोलना चाहा तो लगा कि किसी  चीज से मुंह बंद किया हुआ। थकान महसूस हुई। मैंने आंखे बंद  कर लीं।ये भी लगा कि सात घंटे  बाद होश आया है।कुछ समय बाद लोगों के बोलने की आवाज आई। आंखे खोली तो  डाक्टर के साथ मास्क लगाए  मेरे बिस्तर के पास मेरी पत्नी खड़ी है।उसके पूछने पर मैने  इशारों से कहा कि ठीक हूं। डाक्टर ने मुझे  बताया कि आपरेशन बढिया हुआ है। सब ठीक है। चिंता की कोई बात नहीं। डाक्टर का आभार  जताने के लिए मैं हाथ  जोड़ना   चाहता हूं कि लगता  है कि हाथ अभी टेबिल में बंधे  हैं। पत्नी मुझे देखकर चली जाती हैं। कुछ देर में स्टाफ मुंह से  टेप हटाकर मुंह में दी टयूब  निकाल देता  है। हाथ भी  खोल दिए जाते  हैं। अब मैं  आराम  महसूस  कर रहा हूं ।

आपरेशन कब हो गया पता ही नही चला। स्टाफ ने इतना जरूर कहा कि आपके आपरेशन में छह घंटे लगे हैं।आपरेशन तो दर्द  रहित हो गया किंतु परेशानी की कहानी अब शुरू होती है।लगता है कि होठ  सूख  रहें हैं। जीभ  अकड़  रही है। देखरेख के लिए तैनात स्टाफ नर्स से मैं पीने के लिए पानी मांगता हूं।वह मनाकर देती है।  कहती है कि शाम छह बजे  चाय  दी  जाएगी।  उसके पच जाने पर थोड़ा− थोड़ा पानी  मिलेगा। राउंड  पर आए डाक्टर से मैं होथ सूखने और जीभ के अकड़ने की बात कहतां हूं।वह कहते हैं कि इसे तो  बर्दाश्त करना  होगा।किंतु  होठ भिगोने के लिए एक −दो बूंद  पी देने के कह जाते हैं।एक महीना इसी में निकल जाता है। मुह में छाले हो जाने से कुछ खाना संभव नही होता।  न खाने  से सूखी  उलटी होती हैं।दर्द रहित आपरेशन के बाद चिकित्सा विज्ञान को  इस  एक माह की परेशानी का इलाज भी खोजना होगा।

एक बात और उत्तर प्रदेश और दिल्ली एनसीआर में आपरेशन को जाने वाले को आपरेशन की जरूरत के लिए खून का प्रबंध खुद करना  प़ड़ता है। मैं  इसी को लेकर परेशान था कि हम तो घर से बहुत दूर यहां  गुजरात में हैं ,हमें  खून कौन देगा कौन  तीमारदारी करेगा,किंतु अस्पताल में पता भी नही चला।आपरेशन के स्टीमेट में दो बोतल बल्ड का मूल्य  जुड़ा देखकर मैं  संतुष्ठ हो गया कि अब रक्त का प्रबंध  हमें नही करना  होगा। अस्पताल करेगा।

आपरेशन के बाद  और  बाद में आईसीयू और अस्पतालमें भर्ती  रहने के दौरान स्टाफ  का व्यवहार और सेवा कार्य लाजवाब था।

रविवार 12 मई को अंतराष्ट्रीय नर्सेज डे  मनाया गया।राष्ट्रीय नर्स सप्ताह प्रत्येक वर्ष छह मई को शुरू होता है और 12 मई को फ्लोरेंस नाइटिंगेल के जन्मदिन पर समाप्त होता है। फ़्लोरेन्स नाइटिंगेल को आधुनिक नर्सिग आन्दोलन का जन्मदाता माना जाता है। दया व सेवा की प्रतिमूर्ति फ्लोरेंस नाइटिंगेल "द लेडी विद द लैंप" (दीपक वाली महिला) के नाम से प्रसिद्ध हैं। इनका जन्म एक समृद्ध और उच्चवर्गीय ब्रिटिश परिवार में हुआ था। लेकिन उच्च कुल में जन्मी फ्लोरेंस ने सेवा का मार्ग चुना।

आज अस्पताल के स्टाफ  और  उसके कार्य को  देखता हूं तो  सभी  नर्स में मुझे फ्लोरेंस नाइटिंगेल  नजर आती हैं। सेवा करते वह कभी  बहिन  नजर आती है तो कभी  बेटी  और कभी  मां। ये  अलग बात है कि ये  पैसे के लिए अस्पताल में कार्य कर रही है किंतु इनका समर्पण कही भी फ्लोरेंस नाइटिंगेल से कम मुझे  नजर नही आया।चिकित्सक भी अपने में लाजवाब हैं। मेरे  हृदय का आपरेशन करने  वाले डा सर्वेशवर प्रसाद  हृदय के  प्रतिदिन तीन −चार आपरेशन  करते हैं किंतु न  उनके चेहरे पर कभी तनाव नजर आता है, थकान।  ये ही हालत   डा सर्वेशवर प्रसाद   के जूनियर्स की भी है।फोन पर डाक्टर और उनके सहायक दिन राज− उपलब्ध हैं।उनके कार्य सेवाभाव और समर्पण को देखकर लगता है कि यह सब ऐसे ही नही है।इसके लिए उनका त्याग और मरीज के लिए सेवाभाव उन्हें प्रसिद्धि दे रहा है।

आपरेशन के दूसरे दिन स्टाफ मुझे  ही नही,  हृदय के आपरेशन के सभी  मरीज को  सहारा देकर बैठाकर देता है।  बाद में  उसे खड़ाकर धीरे− धीरे हाल में घुमाया जाता है।एक से दो घंटे के लिए कुर्सी पर बैठाया जाता  है। कहा  जाता है कि आपका आपरेशन हो गया। अब नियमित जीवन शुरू की जीइए।घूमिए।

इतना   सब होने के बाद महसूस होता  है कि अन्य अस्पतालों की तरह इस अस्पताल में भी  लोकल कंपनी की अधिकतर दवाएं मल्टीनेशनल कंपनी से काफी मंहगी है। मेरे आपरेशन के टांकों में पानी आने के कारण मुझे इंट्रावेनस  एंटीबाइटिक इंजैक्शन   लिखा  जाता है।ये  इंजैक्शन अस्पताल में मैडिकल स्टोर पर  1100  रूपये के आसपास   है, जबकि राजकोट के दवाई के होलसेल मार्केट में यह तीन सौ रूपये का मिल रहा है। होलसेल मार्केट में बस दवाई का बिल नही मिलता।सरकार को अस्पताल के  मैडिकल स्टोर पर बिकने वाली दवा पर  नियंत्रण  करना  पडेगा।  एक चीज और  देखने में आई कि प्रधानमंत्री आयुष्मान कार्ड योजना के कार्डधारक अब अस्पताल में निशुल्क  चिकित्सा  सुविधा का लाभ  उठा रहे हैं।लगभग  सभी अस्पताल में आपरेशन के लिए आने वालों  से रिसेप्शन पर ही  पूछा  जाता  है कि आयुष्मान कार्ड  है। कार्ड  देने पर मरीज के प्राय− लगभग सभी  आपरेशन पूरी तरह निशुल्क  हैं। इसमें कोई भेदभाव नही। मरीज हिंदू हो या मुस्लिम बस कार्डधारक होना   चाहिए। प्रधानमंत्री आयुष्मान कार्डधारक की चिकित्सा सरकार ने निशुल्क करके आम आदमी का उपचार बहुत सरल कर दिया।उसका जीवन सरल बना दिया। इस योजना में अभी  सुधार की जरूरत है।किसी भी प्राइवेट  मेडिक्लेम में आपरेशन के बाद दो  महीने का  दवा का व्यय भी  कंपनी की ओर से देय  है,  जबकि आयुष्मान योजना में अस्पताल की ओर से  मात्र  दस दिन की दवा देने का प्रबंध है, जबकि काफी मरीजों का  उपचार लंबा  चलता है। देखने में आया है कि कुछ अस्पताल आपरेशन के बाद की दस दिन की दवा भी मरीज को नही देते।इसलिए इस योजना में अभी  बहुत सुधार की जरूरत है।

अशोक मधुप

( लेखक वरिष्ठ  पत्रकार हैं) 

Wednesday, May 8, 2024

भारत तिब्बत के आजादी आंदोलन का समर्थन कर

 

अशोक मधुप

वरिष्ठ  पत्रकार

चीन आजकल परेशान है।  बताया जा रहा है कि वह भारत के रवैये  से डरा हुआ है।दुश्मन का डरा होना और परेशान रहना  ज्यादा बेहतर है। इससे  वह अपनी समस्या सुलझाने में लगेगा।अपने दुश्मन देशों को तंग नही करेगा।उन पर दबाव –धौंस नही दिखाएगा।कभी चीन का व्यवहार हमें परेशानी कर रहा है।वह सीमापर घुंसपैंठ करता।क्षेत्र के अंदर आए भारत के भाग में जमता और सौदेबाजी करता। किंतु अब ये बदलता  भारत है। बकौल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी   अब भारत दुश्मन को उसके घर में घुंसकर मार रहा है ।  परिणाम है कि आज  चीन की आंखों में आंखे  डालकर बात की जा रही है।  सूचनाएं हैं कि चीन भारत की ब्रह्मोस से डरा हुआ है जब से भारत का शक्तिशाली  ब्रह्मोस मिसाइल  चीन के करीब तैनात की हैं और चीन के दुश्मन फिलीपींस को दी हैं,तबसे  चीन दहशत में हैं। चीन ब्रह्मोस का काट नही निकाल पा रहा है। वह जानता है कि उसके सारे हथियार भी एक बार फायर की गई  ब्रहमोस  को नही रोक सकते।

ब्रह्मोस की काट निकालने के लिए चीन फिलीपींस को डराने के की कोशिश में जुटा है। चीन ने फिलीपींस के बेहद करीब अपने ड्रोन को भेजा है ताकि फिलीपींस डर जाए। लेकिन चीन का ये कदम बताता है कि असली डर फिलीपींस को नहीं बल्कि चीन को है क्योंकि अब साउथ चाइना सी के बिल्कुल करीब अमेरिकी सेनाएं भी आ गई हैं। भारत पहले ही चीन के शत्रु देश वियतनाम की पीपुल्स नेवी को अपना अधुनिक युद्धपोत  आईएनएस कृपाण का हस्तांतरण कर चुका है।इस युद्ध पोत पर आधुनिक मिजाइल तैनात हैं।दरअस्ल अब तक चीन भारत  को घेरने में लगा था।वह भारत के दुश्मन देशों को  आधुनिक अस्त्र− शस्त्र  की आपूर्ति करने में लगा था। अब ऐसा   उसके साथ  हो रहा है  तो वह परेशान है।चीन भारत में अशांति फैलाने वाले नक्सलाइड, मिजों एव अन्य आंतकियों को आधुनिक शस्त्रों की आपूर्ति करता  रहा है।सूचनाएं रही हैं कि उन्हे प्रशिक्षणा भी दे रहा है।ऐसे में समय की मांग है कि भारत अब   चीन के विरूद्ध चल रहे तिब्बत के  पूर्ण स्वतंत्रता के आंदोलन का खुलकर समर्थन करें।जरूरत पड़ने पर तिब्बती के आजादी के आंदोलन के लड़ाकों को शस्त्र के साथ प्रशिक्षण भी दे।


भारत की नही चीन के रवैये से दुनिया के लगभग  सभी देश परेशान हैं।इसी कारण फिलीपींस और अमेरिकी सेना का साझा युद्धाभ्यास हाल में शुरू हुआ।  इस मिलिट्री ड्रील में जापान की सेनाएं भी शामिल हो रही हैं। 16000 हजार सैनिक साझा युद्धभ्यास में शामिल हैं।  सबसे बड़ी बात कि फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया के सैनिक भी कुछ दिन में इस ज्वाइंट एक्सरसाइज से रहेंगे। मतलब पांच  देश चीन को घेरने के लिए एक साथ  होंगे। इस ड्रील में समुद्री और हवाई हमलों का अभ्यास किया जाएगा। भारत के ब्रह्मोस देने के बाद से चीन परेशान है। अभी तो  ब्रह्मोस्त्र तैनात भी नही हुई होंगी कि चीन परेशान है। वह फिलीपींस पर द्रोण उड़ाकर उसे धमका रहा है।सवाल है कि क्या ड्रोन के जरिए चीन ब्रह्मोस के बारे में जानकारी जुटाना चाहता है। सवाल तो ये भी है कि क्या चीन उस ठिकाने का पता लगाना चाहता है, जहां फिलीपींस ब्रह्मोस को तैनात करेगी। चीन ने ड्रोन के अलावा समंदर में मिलिट्री ड्रील के जरिए भी फिलीपींस को आंख दिखाने की कोशिश की है। चीन की नौसेना ने साउथ चाइना सी में लड़ाकू विमानों और युद्धपोत से मिसाइलें दागकर फिलीपींस को डराने की कोशिश की।  

दो दिन के अंदर चीन के ये ये कदम बताते हैं कि चीन ब्रह्मोस मिसाइल की तैनाती से भयभीत है.। चीन के टेंशन इस बात की है कि अब भारत चीन सीमा के साथ चीन-फिलीपींस सीमा पर भी ब्रह्मोस तैनात होगा। अब तो चीन के एक और दुश्मन और पड़ोसी वियतनाम ने भी ब्रह्मोस में दिलचस्पी दिखाई है, जो चीन के लिए खतरे की घंटी है। 

फिलीपींस में भारत की ब्रह्मोस मिसाइल पहुंच गई है और वहां की सैना उसकी तैनाती करेगी। फिलीपींस में अमेरिका ने अपनी नई टायफून मिसाइल प्रणाली तैनात कर रखी है. फिलीपींस में अमेरिका को चार बेस का एक्सेस मिला हुआ है। चीन के करीब जापान पर भी अमेरिका का बेस है। ऑस्ट्रेलिया - सिंगापुर में अमेरिका ने अपना बेस बना रखा है। थाईलैंड और साउथ कोरिया में अमेरिकी सेनाएं तैनात हैं। चीन के करीब गुआम में भी अमेरिका का बेस है। इन जगहों से वक्त पड़ने पर कभी भी अमेरिका चीन पर हमला कर सकता है। चाइना सी के बिल्कुल करीब अमेरिकी सेनाएं भी आ गई हैं। चीनी सेना के प्रवक्ता ने फिलीपीन्स को ब्रह्मोस देने  पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग में इस बात का ख्याल रखा जाए कि इससे किसी तीसरे पक्ष के हितों को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। चीनी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता कर्नल वू कियान ने कहा कि ‘चीन हमेशा मानता है कि दो देशों के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग से किसी तीसरे पक्ष के हितों को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए और क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को खतरा नहीं होना चाहिए।कर्नल वू कियान ने कहा कि एशिया-प्रशांत में अमेरिका की ओर से बैलिस्टिक मिसाइलों की तैनाती का हम कड़ा विरोध करते हैं। अमेरिका का यह कदम क्षेत्रीय देशों की सुरक्षा को गंभीर रूप से खतरे में डालते हुए क्षेत्रीय शांति को खतरा पैदा करता है।

आज चीन को याद आ रहा है कि दो  देशों के रक्षा सहयोग से तीसरे को नुकसान नही पहुंचना  चाहिए, किंतु  जब वह खुद ऐसा  करता है, ता उसे कुछ याद नही आता।  लंबे सयम से  वह  पाकिस्तान को अधुनिकतम युद्धक शस्त्र देने में लगा हुआ है। वह नही जानता कि पाकिस्तान इन शस्त्रों का  प्रयोग कियादेश के विरूद्ध  करेगा।वह अच्छी तरह से जानता  और समझता है। किंतु अपनो हित में उसे कुछ याह नही आता। अब उसके दुशमन देश भारत, अमेरिका और फ्रांस  आदि ऐसा ही कर रहे हैं तो उसे याद आ  रहा है  तीसरे राष्ट्र को  नुकसान न पहुंचे।

भारत फिलीपीन्स को ही ब्रहमोस  मिजाइल नही दे रहा। वियतनाम भी इस मिजाइल को खरीदने में रूचि दिखा रहा है।यह तै है कि वियतनाम भी  खरीदता  है तो भारत उसे  ब्रह्मोस  देगा। प्रथम वरीयता पर देगा। भारत अपना आधुनिकतम युद्धपोत   खुखरी वियतनाम को  पहले ही उपहार में दे चुका है। ये आधुनिक युद्धास्त्रों से  सज्जित युद्धपोत है।भारत की ये  कार्रवाई दक्षिण चीन सागर में चीन के बढ़ते आक्रामक रवैये को लेकर चिंताओं के बीच यह भारत और वियतनाम में बढ़ती रणनीतिक साझेदारी को दर्शाता है। अधिकारियों ने कहा भी  कि भारत ने पहली बार किसी मित्रवत देश को कोई सेवारत पोत उपहार में दिया है।भारतीय नौसेना ने कहा कि पोत पूरी ‘‘हथियार प्रणाली’’ के साथ वियतनाम पीपुल्स नेवी (वीपीएन) को सौंपा गया है। आईएनएस कृपाण, 1991 में सेवा में शामिल किए के बाद से भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े का एक अभिन्न अंग रहा और पिछले 32 वर्षों में कई ऑपरेशन में भाग लिया। लगभग 12 अधिकारियों और 100 नाविकों द्वारा संचालित, जहाज 90 मीटर लंबा और 10.45 मीटर चौड़ा है।

भारत जैसे का तैसा की नीति पर चल चुका है। अब वह कमजोर भी नही है। दुश्तन से आंख में आंख डालकर बात कर रहा है। ऐसे में अब चीन में घाव पर पूरी ताकत से हथौड़ा मारने का समय आ गया।  चीन की बड़ी कमजारी है तिब्बत।  तिब्बत पर उसने कब्जा किया हुआ है।  तिबत की अस्थाई सरकार के धर्मशाला  नगर में चल रही है। भारत के रूख के कारण  तिब्बती अभी तक शांतिपूवर्क आदोलन कर रहे हैं। भारत ने तिब्बत की आजादी की लड़ाई का कभी  समर्थन नही किया। अब समय आ गया है कि भारत इस आंदोलन का समर्थन करें।तिब्बत  सरकार को मान्यता  दे।तिब्बती आंदोलनकारी को शस्त्र और युद्ध प्रशिक्षण दे। जब तक दुश्मन को उसके घर में ही नही घेरा जाएगा, तक तक वह नही मानने वाला।घर में घिर कर वह अपने में उलझ जाएगा और दूसरों को तंग करना  बदं कर देगा।   चीन सरकार वहां बसे उइगुर मुसलमानों पर बेइतहां  जुल्म करने में लगी है।मुस्लिम देश  चुप हैं। भारत अपने परिचित मुस्लिम देश  और संगठनों से उइगुर मुसलमान की आजादी और कल्याण के लिए  आवाज बुलंद कराएं ।

 

 


 

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Sunday, April 28, 2024

देश को संदेश देने में नाकाम रही विपक्ष की रांची रैली

 



अशोक मधुप

वरिष्ठ पत्रकार

विपक्षी दलों की रविवार को झारखंड की राजधानी रांची में  हुई  महारैली    देश को  कोई स्पष्ट  संदेश नही दे सकी। हालाकिं  इससे बड़ी  उम्मीद थी।उम्मीद  थीं कि राजनैतिक दल अपने  चुनाव घोषणा  पत्र अब तक  प्रस्तुत कर चुके  हैं।इस रैली में वे  काँमन मिनीमम कार्यक्रम जारी कर सकतें हैं किंतु ऐसा कुछ नही  हुआ।हर बार की तरह सिर्फ भाषण  तक ही सीमित रही रैली। 

झारखंड की राजधानी रांची में विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' ने 'उलगुलान न्याय महारैली' का नाम दिया गया है। इस दौरान मंच में बड़े-बड़े दिग्गज नेता मौजूद रहे। इसके साथ ही मंच पर दो खाली कुर्सियां रखी गईं। एक जेल में बंद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के लिए और दूसरी झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के लिए। उनकी जगह केजरीवाल की पत्नी  नीता केजरीवाल और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन ने मंच साझा किया।भारी संख्या में लोग रैली में पहुंचे
रैली के दौरान भीड़ ने 'जेल का ताले टूटेंगे, हेमंत सोरेन छूटेंगे' और 'झारखंड झुकेगा नहीं' जैसे नारे लगाए। झारखंड की राजधानी का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास होने के बावजूद भारी संख्या में लोग रैली में शामिल हुए। चिलचिलाती गर्मी के बीच सभी रैली के समर्थन जुटे रहे। 'उलगुलान' शब्द, जिसका अर्थ क्रांति है। इसे आदिवासियों के अधिकारों के लिए अंग्रेजों के खिलाफ बिरसा मुंडा की लड़ाई के दौरान गढ़ा गया था।

हेमंत सोरेन को कथित भूमि धोखाधड़ी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 31 जनवरी की रात को गिरफ्तार किया था। इसी केंद्रीय एजेंसी ने 21 मार्च को अरविंद केजरीवाल को शराब नीति घोटाले से जुड़े मामले में गिरफ्तार भी किया था। हालांकि, झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष और आप सुप्रीमो के लिए कुर्सियां खाली रखी गई थीं, लेकिन उनकी पत्नियां कल्पना सोरेन और सुनीता केजरीवाल मंच पर बैठी थीं। कल्पना सोरेन और सुनीता केजरीवाल  का भाषण मुख्यतः  अपने  पतियों की गिरफ्तारी के विरोध में था। दोनों का दावा था कि उनके पतियों को केंद्र की मोदी सरकार  ने गलत ढंग से गिरफ्तार कराया  हुआ  है। केंद्र की मोदी सरकार विपक्ष की आवाज दबा देना चाहती है। इसके लिए सबको एकजुट होना  होगा।रैली में नेताओं  का यह भी   आरोप था कि  केंद्र में भाजपा फिर लौटी तो देश से लोकतंत्र  खत्म हो  जाएगा।  रैली में शामिल नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर लगातार झूठ बोलने, गारंटी के नाम पर लोगों को ठगने, लोकतंत्र को कमज़ोर करने और जुमलों के सहारे राजनीति करने के आरोप लगाए।नेताओं ने कहा कि देश में बेरोज़गारी चरम पर है और प्रधानमंत्री मोदी का हर साल दो करोड़ नौकरियों का वादा हवा में घूम रहा है.

देश में पहले चरण के मतदान के ठीक अगले दिन आयोजित उलगुलान न्याय महारैली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि पहले चरण के चुनाव में बीजेपी की हवा निकल गई है।उन्होंने कहा कि वे 400 पार की बात करते हैं लेकिन 180-190 सीटों से आगे नहीं जाने वाले. इसलिए, वोट देना ज़रूरी है।

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा, “पहले चरण में ही उत्तर प्रदेश में इनकी हालत ख़राब हो गई है और जब यूपी इन्हें हटा सकता है, तो आप क्यों नहीं। यह देश मोदी की नहीं, संविधान की गारंटी चाहता है।”

 जबकि झारखंड में मुख्य विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने इस रैली को पूरी तरह फ्लॉप करार दिया है.

बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल नाथ शाहदेव ने कहा, “इनके मंच पर भ्रष्टाचार में शामिल नेताओं का जमावड़ा हुआ और ये भ्रष्टाचार उन्मूलन की बात करते हैं. यह हास्यास्पद है।”

प्रतुल नाथ शाहदेव ने कहा, “इनका दावा था कि रैली में पांच लाख लोग शामिल होंगे लेकिन आए बमुश्किल 10-15 हज़ार लोग। उनमें आपस में मारपीट हुई। ये लोग सिर्फ़ सत्ता में आने के लिए एक मंच पर आए थे। रैली में सिर्फ़ परिवारवादियों और भ्रष्टाचारियों की भागीदारी थी. इसलिए इसे सुपर फ़्लॉप कहा जाना चाहिए।”हालांकि उलगुलान न्याय महारैली में लोगों की खासी भागीदारी देखी गई. झारखंड के सुदूर इलाक़ों से लोग बसों, गाड़ियों और ट्रेनों से रांची पहुंचे।ऐसे लोगों को लाने के विशेष इंतज़ाम किए गए थे. रैली स्थल पर लोगों की भीड़ देर शाम तक जमी रही।

उलगुलान रैली में शामिल होने आई कार्यकर्ताओं की भीड़ में दो गुटों के बीच झड़प हो गयी। कुर्सियां भी तोड़ी गई।

ये मारपीट ,ये  हुडदंग कोई  अच्छा  संदेश  नही दे सकें।

उलगुलान रैली में शिबू सोरेन, बसंत सोरेन, कल्पना सोरेन, यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव, बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव, अरविंद केजरीवाल की पत्नी सुनीता केजरीवाल, पंजाब के सीएम भगवंत मान, आप सांसद संजय सिंह, शिवसेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी, नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख फारूक अब्दुल्ला और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे शामिल हुए।रैली में शामिल नहीं हुए राहुल गांधी।जानकारी के मुताबिक, कांग्रेस नेता राहुल गांधी की तबीयत अचानक खराब हो गई है। इस वजह से वे रैली में शामिल नहीं हुए।

सात चरणों में पूरे  होने  वाले  लोकसभा चुनाव का  पहला  चरण   पूरा हो गया।मतदाताओं ने प्रत्याशियों निर्णय इवीएम को  सौंप  दिया।दूसर चरण  का मतदान 26  अप्रैल  को  होना है।इतना सब होने  पर भी विपक्षी  28 दलों का गठबंधन  अब तक   न कोई  अपना  कॉमन प्रोग्राम प्रस्तुत  कर सका। न नही सभी दलों द्वारा सर्व सम्मत नेता   ही चुना गया।

दरअस्ल विपक्षी दलों का यह गठबंधन ,  उन दलों का भी गठबधंन कहां जा  सकता है, जो दल भाजपा के साथ  नही जा सके। अवसर नही मिला। इस विपक्षी  दलों के आई­.एन­.डी.आई.ए. गठबंधन  को खड़ा  करने में बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार का बड़ा योगदान रहा।ये सब  उन्ही की मेहनत से खड़ा  ह़ुआ। किंतु मौके की तलाश में  बैठे नितीश कुमार  अवसर मिलते ही इस गठबंधन से किनारा करके  बिहार में भाजपा के साथ गठबधंन कर लिया। भाजपा के साथ मिलकर अपनी सरकार  बनाली।इसी तरह पश्चिमी उत्तर  प्रदेश  के  राष्ट्रीय  लोकदल के जयंत  चौधरी ने किया।भाजपा से   बात पक्की होने  तक वे सपा  के अखिलेश यादव और कांग्रेस के नेताओं के साथ  थे। बात पक्की होते ही  उन्होंने भाजपा के साथ गठबंधन  कर लिया।28 दलों वाले  इस  एलायंस  में प्रायः  वह ही दल हैं  जिनकी अपने  प्रदेश में  सरकार  है।  प्रदेश में  सरकार  होने के कारण वह भाजपा  से गठबधंन नही कर पा रही।

चुनाव का एक चरण बीत गया।दूसारा 26 को   है।इसके  बाद पांच  चरण शेष  हैं।  लगता है कि ये  भी  जल्द ही  हो  जांएगे,  विपक्ष के 28 दलों के एलाइंस इंडिया'  का मिनिमम   कार्यक्रम तै  हुअ। ये  ब्ठकर कोई  ऐसा  एजेंडा भी  नही बना  पाए कि  बहुमत में आने  पर किस कार्यक्रम  पर वे  सरकार  चलांएगे। दूसरा  उनका संयुक्त प्रधानमंत्री कौन होगा¸ॽक्या कुछ प्रदेशों की तरह  तीन या छह− छह माह  में अब प्रधानमंत्री भी बदले  जांएगे।जो भी  हो  विपक्षी  गठबंधन इंडिया  का   जैसे अच्छा  नाम  मिली था,  वैसा कुछ आगे नही हुआ।उसने  निराश  ही किया। देश   का प्रतिनिधित्व  करने  वाले 28 दलों के गठबंधन से उम्मीद काफी ज्यादा  थीं, किंतु  वह एक पर भी  खरा  नही उतर सका। ये सारे दल अलग −अलग विचार और सिद्धांतों के मानने वाले हैं।ऐसे में एकजुट होने के लिए इनका काँमन ऐजेंडा  भी होना चाहिए।  ऐसा न होने पर  इनकी एकजुटता छलावा है।धोखा  है।    अब तो इनका का उददेश्य केंद्र की मोदी सरकार  की आलोचना करना   रह गया।आलोचनाएं भी सकारात्मक नही।नकारात्मक।

अशोक मधुप

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार  हैं)